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राज्यकर्मियों की हड़ताल का पहले दिन मिलाजुला असर

Tue, 22 Dec 2015 11:34 PM IST
शाहजहांपुर।
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 विभिन्न संवर्गों के वेतनमान में संशोधन व अन्य कई मांगों को लेकर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रांतीय आह्वान पर मंगलवार से शुरू हुई राज्य कर्मियों की हड़ताल का मंगलवार पहले दिन जिले में मिलाजुला असर रहा। कलेक्ट्रेट और विकास भवन के कुछ कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहा। कई महकमों के दफ्तरों में कर्मचारी अपने पटलों पर रोज की तरह राजकाज में व्यस्त दिखे। कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार से जिला अस्पताल की व्यवस्था गड़बड़ा गई और अन्य कई विभागों के नियमित कामकाज में ठहराव आ गया।
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हड़ताल को कामयाब बनाने के लिए कर्मचारी नेताओं का मूवमेंट सुबह नौ बजे से शुरू हो गया। परिषद के जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित की अगुवाई में वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिनेश चंद्र सक्सेना, जिला मंत्री अमित सिंह, ओएन शुक्ला, सीमांत मिश्रा, विवेक यादव, अतुल गुप्ता, पवन मिश्रा आदि ने विभिन्न कार्यालयों में जाकर कर्मचारियों का उत्साहवर्धन किया। यही नहीं, पटलों पर मौजूद दिखे साथी कर्मचारियों को सांगठनिक एकता की दुहाई देकर उन्हें भी हड़ताल की मुख्य धारा में शामिल कर लिया। हड़ताल का विभागों में नजारा कुछ इस तरह रहा।
जिला असपताल
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने सुबह दो घंटे कार्य बहिष्कार कर अस्पताल गेट पर प्रदर्शन किया। इससे अस्पताल की व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई। स्टाफ नर्सों के हड़ताल पर रहने के कारण वार्डों में भर्ती मरीजों की देखभाल और समय से उपचार मिलने में व्यवधान पड़ा। फार्मासिस्टों के कार्य बहिष्कार से वहां डिस्पेंसरी से दवाओं का वितरण नहीं हो पाया और मरीजों को इंजेक्शन नहीं लग पाए। पैथालोजी सेक्शन में काम ठप होने से जांचें कराने पहुंचे मरीज इधर-उधर भटकते रहे। आई, डेंटल और एक्सरे सेक्शन का कामकाज भी बाधित हुआ।
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कलक्ट्रेट
वैसे तो कलक्ट्रेट के सारे दफ्तर खुले रहे। रोजमर्रा की तरह कर्मचारियों ने रजिस्टर पर हाजिरी भी दर्ज की। मगर काम करने के बजाय पटल छोड़कर दफ्तरों से बाहर निकल आए। अपवाद के तौर पर डीएम कोर्ट, सिटी मजिस्ट्रेट न्यायालय, रिकार्ड रूम में कर्मचारी अपनी ड्यूटी बजाते दिखे। वजह यह रही कि सिटी मजिस्ट्रेट नरेंद्र सिंह अपने कोर्ट कक्ष में मौजूद रहे। दोपहर को एडीएम प्रशासन मुनेंद्रनाथ उपाध्याय अपने कक्ष में पहुंच गए। इससे अपने काम कराने पहुंचे लोगों को बैरंग अपने घर जाना पड़ा।
कोषागार
कोषागार में भी हड़ताल का मिला-जुला असर रहा। वरिष्ठ कोषाधिकारी विशंभर बाबू सुबह नियत समय पर ट्रेजरी स्थित कार्यालय पहुंच गए। उनकी मौजूदगी के कारण वहां के कर्मचारी पटल छोड़ने को लेकर काफी दुविधा में रहे। इससे कुछ सीटें खाली तो कुछ भरी दिखीं। पेंशन अनुभाग के कई कर्मचारी हड़ताल के बहाने कुर्सियां दफ्तर के बाहर डालकर धूप का लुत्फ उठाते रहे। इस दौरान पेंशनरों की बुजुर्गियत पर दया दिखाते हुए कर्मचारियों ने जीवित प्रमाण पत्र सत्यापित करने का काम जारी रखा, लेकिन हड़ताल के चलते कोई बिल पास नहीं हो सका।
विकास भवन
विकास भवन के अधिकांश कार्यालय दिन भर सूने रहे। गन्ना विभाग, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा, कृषि, पंचायत राज आदि दफ्तरों के बाहर कर्मचारी बैठे बतियाते देखे गए। समाज कल्याण और विकलांग कल्याण विभाग में पेंशन आदि योजनाओं का काम ठप रहा। विकास और पंचायत विभाग के काम भी प्रभावित हुए। विकास भवन कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष अतुल गुप्ता और मिनिस्ट्रीयल एसोसिएशन के कर्मचारी नेता पवन मिश्रा कर्मचारियों को हड़ताल के लिए प्रेरित करते रहे।
लोक निर्माण विभाग
परिषद के प्रमुख घटक में शुमार डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ की स्थानीय शाखा से जुड़े अवर अभियंताओं ने पेन डाउन हड़ताल के तहत लोकनिर्माण विभाग कार्यालय में डेरा डालकर वहीं पर धरना दिया और सभा की। इस दौरान शैलेंद्र अवस्थी, एचएन मिश्रा, एम रहमान, एसपी पांडेय आदि ने केंद्र के समान भत्तों की मांग उठाई। जेई संवर्ग के हड़ताल पर रहने से विभाग के विकास और निर्माण संबंधी कार्य प्रभावित हुए।
वाणिज्य कर विभाग
वाणिज्य कर विभाग के खिरनीबाग और टाउनहाल स्थित दोनों कार्यालयों में हड़ताल के कारण व्यापारियों को पंजीयन कराने और बिक्री कर की अदायगी किए बगैर निराश लौटना पड़ा। कर्मचारियों ने हाजिरी लगाने के बाद गेट पर मीटिंग की। दोपहर बाद कर्मचारियों ने अपनार्र्र्र समय बिताया और दोपहर बाद से घरों की राह पकड़ ली।
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