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जुलाई में सामान्य वर्षा मानक से 78 फीसदी कम हुई बारिश

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शाहजहांपुर। मानसून सीजन शुरू हुए सवा माह बीत गया, लेकिन अभी तक पर्याप्त बारिश नहीं होने से सूखे के हालात बनने लगे हैं। मौसम वैज्ञानिक के अनुसार जुलाई में मानक की तुलना में सिर्फ 22 फीसदी बारिश हुई है। हालांकि, दो दिन से हल्की वर्षा हो रही है, लेकिन ऐसी नहीं कि धान के खेत लबालब हो सकें। धान की पौध मुरझाने लगी है।
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खरीफ सीजन में जिले में 2.43 लाख हेक्टेयर रकबा विभिन्न फसलों के लिए अनुमानित किया गया। धान की विभिन्न किस्मों की रोपाई के लिए 2.07 लाख हेक्टेयर रकबा निर्धारित है। कृषि विभाग के अधिकारी दो सप्ताह से दावा कर रहे हैं कि जिले मेें धान की रोपाई का काम लगभग पूरा हो चुका है लेकिन अभी 25-30 फीसदी से ज्यादा धान के खेत खाली पड़े है। जिन किसानों ने जून के अंत में हुई बारिश के बाद आगे भी बरसात होने की उम्मीद में धान की रोपाई कर दी वह खासे परेशान हैं। यही नहीं, मक्का, तिल, उड़द, अरहर, बाजरा आदि की बोआई भी मानसून के इंतजार में लेट हो गई है।
अब मानसूनी बरसात की भरपाई होगी कठिन
शाहजहांपुर। गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह का मानना है कि मानसून सीजन सितंबर मध्य तक रहता है लेकिन शुरुआती दो माह में औसत वर्षा में आई कमी की भरपाई आगे होनी कठिन है। उन्होंने बताया कि जुलाई में सामान्य वर्षा मानक 327 मिमी निर्धारित है, लेकिन अभी सिर्फ 72 मिमी पानी गिरा। यह स्थिति सामान्य से 78 प्रतिशत कम है। बताया कि इस वर्ष जून में सामान्य वर्षा मानक 137 मिमी के बजाय केवल 81 मिमी बरसात हुई जो बीते वर्ष की तुलना में करीब 24 प्रतिशत कम है। उनका कहना है कि धीमी गति से हो रही बारिश का अधिकांश पानी जमीन सोख चुकी है। इसलिए अब फसलों को पर्याप्त पानी की जरूरत है, लेकिन अगस्त में बारिश का यही ढर्रा बना रहा तो फसलों को नुकसान होगा।
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फसलों की उत्पादकता और गुणवत्ता होगी प्रभावित
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी एवं वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक डॉ. एनसी त्रिपाठी के अनुसार सितंबर तक बारिश के आसार बने रहेंगे, इसलिए किसानों को निराश नहीं होना चाहिए लेकिन बोई जा चुकीं फसलों की पानी की कमी के कारण लगातार देखभाल करनी होगी। उनका कहना है कि दो दिन लगातार बारिश होने पर भी धान की पौध बढ़वार ले सकेगी। वर्षा के इंतजार में फसलें ज्यादा देर से बोई गईं तो उनका दाना छोटा पड़ जाएगा और इससे उपज में भी कमी आ सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि बारिश कम होने के कारण बोआई मेें देरी करने के बजाय किसान नहर-नलकूप से पानी लगाएं अन्यथा फसलों का दाना छोटा पड़ने से उनकी गुणवत्ता प्रभावित होगी और औसत उत्पादकता भी कम हो जाएगी।
सूखे की आशंका से किसान परेशान, कैसे हो सिंचाई
पुवायां। सावन में चल रही पुरवा हवा ने किसानों को परेशानी में डाल दिया है। नौबत यह आ गई कि तमाम जरूरी खर्चे रोक देने पड़े हैं और जेवर आदि तक गिरवी रखकर फसल की सिंचाई करनी पड़ रही है। पुवायां तहसील में भारी भूभाग पर काफी अगेती धान की खेती की जाती है। बड़े फार्मरों ने नलकूपों के सहारे धान की रोपाई करा दी थी। छोटे किसानों ने भी इस उम्मीद में धान की रोपाई कर दी कि आगे चलकर बारिश होने से धान की अच्छी फसल तैयार हो सकेगी लेकिन बारिश नहीं होने से अब धान की फसल मुसीबत बन गई है। किसान रामकुमार ने बताया कि अब सिंचाई करना और रोग से फसल को बचाना भारी पड़ रहा है। सिंचाई के साथ ही निराई और दवाओं में खर्च से किसान की कमर टूट गई है। पुवायां के किसान रामचंद्र, राजेश, विकास, रामलाल आदि का कहना है कि तीन चार साल से लगातार सूखा पड़ रहा है। कम गहराई की बोरिंग फेल हो चुकी हैं। हर साल नई बोरिंग करानी पड़ती है, उस पर भी सूखे के कारण धान में लगने वाली पत्ती लपेट जैसी तमाम बीमारियों से किसान परेशान है। जिले को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित कर किसानों को राहत देनी चाहिए।
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