शाहजहांपुर/ रोजा। लखनऊ-मुरादाबाद के बीच ट्रेनों को 130 किमी की स्पीड से दौड़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इसे पूरा करने के लिए पिछले एक साल से ब्लॉक लेकर ट्रैक की मरम्मत और पटरियों के बदलने का काम किया जा रहा है। इसके बाद भी ट्रेनों का संचालन सुचारु रूप से नहीं हो पा रहा है। 326 किलोमीटर के इस रेल रूट पर 34 जगह पैबंद लगे हैं, जिनकी वजह से ट्रेनों का 130 किमी की गति से दौड़ना तो दूर वर्तमान में तय स्पीड से भी चलना मुश्किल हो रहा है।
अपलाइन पर लखनऊ से मुरादाबाद के बीच रोजाना चार दर्जन से अधिक ट्रेनों का संचालन होता है। ये ट्रेनें अपनी निर्धारित गति से दौड़ती रहीं हैं। अब रेलवे का आधुनिकीकरण किया जा रहा है, तो ट्रैकों को दुरुस्त कराए जाने का काम भी किया जा रहा। जिससे इस रूट पर ट्रेनों को 130 किमी की गति से दौड़ाया जा सके। मगर 326 किमी के इस रूट पर 34 जगह पैबंद लगे हैं, जो ट्रेनों की गति में अवरोध पैदा कर रहे हैं। जिसकी वजह से लोको पायलट को ट्रेन की गति कंट्रोल करनी पड़ती है। यह गति 15 से लेकर 90 किमी तक रखनी पड़ती है।
कहां पर कितनी जगह लेना पड़ता है कॉशन
लखनऊ स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर दो, पांच और छह पर पांच किमी की स्पीड रहती है। प्लेटफार्म नंबर छह से ही ओएचई पोल 2077 से 2079 के बीच मोड़ है। आलमनगर में यार्ड लाइन नंबर तीन से 45 किमी, काकोरी यार्ड से केएमबीएच अंडर लाइन पर 45 किमी. और 30 की गति रहती है। दिलावारनगर में रहीमाबाद यार्ड पर 75, संडीला यार्ड से उमरतली पर 60 किमी की गति रखनी पड़ती है। इसी तरह से हरदोई में कौरहा यार्ड पर मोड़ ओर लुक आउट रहता है। राम प्रसाद बिस्मिल से रोजा यार्ड तक 10, रोजा से शाहजहांपुर अंडर लाइन पर 30 की गति का कॉशन है। टिसुआ यार्ड पर मोड़ के कारण गति कम रहती है। इसी तरह से बरेली कैंट में तीन, बरेली यार्ड से तीन, भिटोरा यार्ड पर एक, नगरिया सादात पर तीन, मिलक में एक, दुगुनपुर में दो, धमौरा यार्ड में एक, रामपुर में तीन, कटघर में दो, मुरादाबाद में एक जगह कॉशन लेना पड़ता है।