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पुवायां की बेटी ने मचाया पंजाब में धमाल

Wed, 06 Apr 2016 11:22 PM IST
ब्यूरो/शाहजहांपुर
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पुवायां की बेटी
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पुवायां के छोटे से गांव गुलौली निवासी दिलीप सिंह फौजी की पौत्री और बलजीत सिंह, मंजीत कौर की पुत्री बीए तक की शिक्षा प्राप्त 21 वर्षीय बेअंत कौर ने पुवायां का नाम रोशन करते हुए डीडी पंजाबी पर प्रसारित सुर सरताज (सीजन 4) में फाइनल में जगह बनाई है। फाइनल में उनका मुकाबला जालधंर की नेहा से होगा। बेअंत की इस सफलता से परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल है। 
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बेअंत का बचपन से ही गाने का शौक था। वह कक्षा छह में गांव महुरेना के गुरू तेग बहादुर पब्लिक स्कूल में पढ़ने पहुंची तो स्कूल के प्रबंधक गीतकार पंजाब सिंह कहलो को बेअंत की प्रतिभा के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने बेअंत को प्रोत्साहन देकर गायकी के बारे में काफी कुछ बताया और सुरों की जानकारी रखने वाले लोगों से भी बेअंत को प्रशिक्षण दिलाया। बाबा के फौज से सेवानिवृत्त होने के कारण घर में कड़ा अनुशासन था, बेअंत की गायकी पर भी परिवार के लोगों ने ऐतराज जताया, लेकिन उसकी जिद और लगन को देखते हुए परिवार के लोगों ने भी उसे आग बढ़ाने की ठान ली। 
स्कूल सहित अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बेअंत ने हिस्सा लेकर लेकर गायन की प्रतिभा को और ज्यादा निखारा। दिसंबर 15 में उन्हें पता चला कि दूरदर्शन के पंजाबी चैनल पर सुर सरताज का चौथा सीजन शुरू होने वाला है और इसके लिए ऑडीशन शुरू हो गए हैं तो वह परिवार के लोगों के साथ जालंधर पहुंची और ऑडीशन में भाग लिया। चैनल के जज उनकी गायकी से प्रभावित हुए और उनका चुनाव सुर सरताज कार्यक्रम के लिए कर लिया गया। कार्यक्रम में विभिन्न स्तरों पर लगभग 350 प्रतिभागियों को गायन में पछाड़ते हुए बेअंत कौर ने फाइनल में स्थान बना लिया। फाइनल की शूटिंग 24 अप्रैल को जालंधर में होगी, जहां उनका मुकाबला जालंधर की नेहा से होगा। 
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नौ को गुलौली आ रही है दूरदर्शन जालंधर की टीम
पुवायां। बेअंत कौर के सुर सरताज कंपटीशन के फाइनल में पहुंचने के बाद दूरदर्शन जालंधर की टीम उनके घर गांव गुलौली आ रही है। दूरदर्शन की टीम बेअंत कौर का इंटरव्यू लेकर उसे चैनल पर प्रसारित करेगी। बेअंत की सफलता से परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल है। लता मंगेशकर को अपना आदर्श मानने वाली बेअंत कौर गायकी में काफी आगे जाकर प्रदेश और देश का नाम रोशन करना चाहती है। अब तक मिली सफलता का श्रेय वह वाहेगुरू के अलावा अपने प्रथम गुरू पंजाब सिंह कहलो और परिवार के लोगों को देती है।
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