शाहजहांपुर। शहर से सटे अटसलिया औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों को निर्बाध आपूर्ति देने के लिए बनने वाला उपकेंद्र फाइलों में कैद होकर रह गया है। दो वर्ष बाद भी उपकेंद्र नहीं बनने से उद्यमियों को लोकल फॉल्ट व ट्रिपिंग से जूझना पड़ रहा है। इकाइयों को लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है।
अटसलिया उपकेंद्र से राइस मिल, सीमेंट ईंट बनाने वाली फैक्टरी, बीज, नमकीन, कचरी-पापड़ की फैक्टरियों समेत 40 व्यावसायिक कनेक्शन हैं। अटसलिया उपकेंद्र से इन कनेक्शनों के लिए अलग से इंडस्ट्रीज फीडर बना दिया गया। 200 एम्पीयर की क्षमता वाले फीडर पर लोड तीन सौ से पार निकलने पर आए दिन तार टूटकर गिर जाते हैं। ऐसे में औद्योगिक इकाइयों की मशीनें ठप हो जाती हैं।
उद्यमियों के मुताबिक, मशीन बंद होने से उन्हें मोटी चपत लगती है। समस्या के समाधान के लिए गत वर्ष उपकेंद्र बनाने के लिए प्रस्ताव बनवाया था। बरतारा के पास जमीन भी तलाश करा दी थी, लेकिन उपकेंद्र बनाने का प्रस्ताव फाइलों में कैद होकर रह गया है। इसके चलते उद्यमियों को काफी नुकसान सहन करना पड़ रहा है।
उपकेंद्र को छोड़िये, अलग फीडर बनाने का प्रस्ताव तक पास नहीं
उद्यमियाें को मिलने वाली बिजली के लिए एक अतिरिक्त फीडर बनाने के लिए 70 लाख रुपये का प्रस्ताव भी दिया गया था। 10 एमवीए की क्षमता का उपकेंद्र तो छोड़िए, अधिकारियों ने फीडर तक बनाने को लेकर कोई संज्ञान नहीं लिया है।
उद्योग बंधु की बैठक में उपकेंद्र को लेकर चर्चा हुई थी। उपकेंद्र को बनाने के लिए प्रशासन की ओर से पत्र लिखे जाने का आश्वासन मिला है। संभावना है कि नए उपकेंद्र के प्रस्ताव पर मुहर लग जाएगी। - गुरजीत मोगा, चैप्टर चेयरमैन-आईआईए
अटसलिया औद्योगिक क्षेत्र में नया उपकेंद्र बनाने की कार्ययोजना प्रक्रिया में है। इस वर्ष किसी भी उपकेंद्र को लेकर स्वीकृति नहीं मिली है। -जागेश कुमार, एसई, बिजली निगम