फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shahjahanpur News: यात्रियों की जिंदगी से खिलवाड़, बिना पंजीकरण दौड़ रहीं निजी बसें

विज्ञापन
तिलहर में खड़ी निजी बस और उसके ऊपर बैठे लोग। संवाद
विज्ञापन
शाहजहांपुर। दिल्ली मार्ग पर बिना पंजीकरण के डग्गामार बसें यात्रियों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। परिवहन विभाग के आंकड़ों में 22 स्लीपर समेत 201 बसें ही दर्ज हैं। जबकि शहर, तिलहर, कटरा समेत ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में बसें दौड़ाई जा रही हैं। ये बसें परमिट की शर्तों का पालन तक नहीं कर रही हैं और रोडवेज बस से दो से ढाई सौ रुपये कम किराये में दिल्ली पहुंचा रही हैं।
विज्ञापन

मंगलवार को जयपुर में हाईटेंशन लाइन से बस में आग लगने से तीन यात्रियों की मौत हो गई थी। ऐसे ही हादसे यहां की बसों में भी होने से इन्कार नहीं किया जा सकता। दिल्ली मार्ग पर दौड़ने वाली बसें परमिट, फिटनेस समेत अन्य मानकों को दरकिनार कर दौड़ रही हैं।
प्रभावी चेकिंग अभियान नहीं चलने से बसें बेधड़क चल रही हैं। शहर में रोडवेज बस अड्डे के सामने से निजी बसों की बुकिंग होती है। शाम ढलते ही निजी बसें रोडवेज बस अड्डे से चंद कदम की दूरी पर रेलवे फाटक के पास से भरी जाती है। पुलिस लाइन, अशफाक नगर चौकी और यातायात पुलिस का कार्यालय नजदीक होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जाती है।
विज्ञापन

इसी तरह रामनगर तिराहा, महाकाली ओवरब्रिज, हरदोई बाइपास चौराहा, बरेली मोड़, रोजा बस अड्डा, बंथरा समेत कई स्थानों से निजी बसों का संचालन होता है। स्लीपर बस में यात्री के लेटने तक की सुविधा रहती है। परिवहन निगम के कर्मियों के अनुसार, शाहजहांपुर से दिल्ली तक रोडवेज की एसी बस का किराया 822 रुपये है। वहीं निजी बस 600 रुपये में दिल्ली पहुंचाती है।
इसी तरह सामान्य रोडवेज बस का किराया 560 रुपये है तो डग्गामार बस 300 से 350 रुपये में पहुंचाती है।

पूरी गृहस्थी लेकर चलते हैं लोग, नहीं होती सामान की जांच
परिवहन निगम की बस में यात्री के पास संदिग्ध चीज दिखने पर सफर नहीं कराने के निर्देश हैं। जबकि निजी बसों में पूरी गृहस्थी लेकर यात्री चलते हैं। उनके सामान की जांच तक नहीं की जाती है। ऐसे में हादसा होने का डर बना रहता है। इसे लेकर अधिकारी भी संज्ञान नहीं लेते हैं। बस चालकों ने अपने विजिटिंग कार्ड बांट दिए हैं, साथ ही फोन से बुकिंग की सुविधा भी दे रखी है।


दबंगई के साथ चल रहा डग्गामार बसों का नेटवर्क, एआरएम से कर चुके मारपीट
जिले में डग्गामार वाहनों का पूरा नेटवर्क चल रहा है। नेताओं के करीबी संचालक पूरी दबंगई से बसों को चलवाते हैं। खादी व खाकी के संरक्षण में डग्गामार बसें संचालित होती है। निजी बस संचालक रोडवेज अड्डे के अंदर से सवारियों को बुलाकर बैठा लेते हैं। पिछले वर्ष निजी बस के परिचालक को रोडवेज बस स्टैंड से सवारी बुलाते हुए एआरएम ने पकड़ लिया था। तब निजी बस संचालकों ने उनकी पिटाई कर दी थी। मामले में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद बस संचालक समेत चार लोग जेल गए थे।


यहां भी चलती हैं बसें
तिलहर के भक्सी तिराहा पूर्व व सिटी अस्पताल के पास ढाबे पर शाम होते ही बसें पहुंचना शुरू हो जाती है। इसी तरह निगोही अड्डा, ऊनकला, तालगांव, कांट, जलालाबाद आदि क्षेत्रों से भी डग्गामार बसें चलती हैं।


ये हैं परमिट की शर्तें

परिवहन निगम की ओर से ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट जारी किया जाता है। इसमें यात्री को एक स्थान से बैठाकर दूसरे स्थान पर छोड़ सकते हैं। रास्ते में बस को रोककर सवारी बैठाने का प्रावधान नहीं है। परमिट का प्रत्येक साल रिन्यूवल कराना होता है।

निजी पर प्रतिबंध लगे तो बढ़ जाएगा राजस्व
परिवहन निगम के बेड़े में 144 सरकारी व 79 अनुबंधित बसों का संचालन होता है। अनुबंधित बसों का परिवहन निगम सारा व्यय करता है। एआरएम अरुण कुमार ने बताया कि डग्गामार बसों पर दिल्ली मार्ग पर प्रतिबंध लगा दिया जाए तो निगम के राजस्व में बढ़ोतरी होगी।


डग्गामार बसों के खिलाफ लगातार अभियान चल रहा है। मंगलवार को अल्हागंज में एक व बरेली में दो बसों को पकड़ा है। तीन बसें सीज कर आठ का चालान किया गया है। बिना वैध प्रपत्र गाड़ी चलते मिलने पर कार्रवाई की जाती है।



- सर्वेश सिंह, एआरटीओ

तिलहर में खड़ी निजी बस और उसके ऊपर बैठे लोग। संवाद

तिलहर में खड़ी निजी बस और उसके ऊपर बैठे लोग। संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें