बादशाहनगर निवासी शिक्षक पुत्र प्रत्यूष कुमार मिश्र ने अपनी प्रतिभा के बल पर परिवार ही नहीं, बल्कि जिले का नाम सात समंदर पार पहुंचाया है। वैज्ञानिक क्षेत्र में कुछ कर गुजरने का जज्बा रखने वाले प्रत्यूष इन दिनों कोरिया के यूनिस्ट/उल्सन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नालॉजी में प्रवेश लेकर सपनों को नई उड़ान देने में जुटे हैं।
प्रत्यूष बादशाहनगर निवासी शशिकांत मिश्र और कमलेश्वरी देवी के पुत्र है। शशिकांत पीलीभीत के चिंरौजी लाल वीरेंद्र पाल सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में हिंदी केेे अध्यापक हैं। शशिकांत बताते हैं कि उनके इकलौते बेटे प्रत्यूष बचपन से कुछ अलग मिजाज का था। वर्ष 2010 में आईआईटी करने के बाद उसे भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान पुणे में प्रवेश मिल गया, 2015 में एमएस की उपाधि भी उसकी झोली में आ गई। इस बीच प्रत्यूष के कई शोधपत्र अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हो चुके थे, इसलिए दक्षिण कोरिया के उल्सन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नालॉजी से उसे मेडिसनल कैमिस्ट्री में शोध करने के लिए उसे आमंत्रित किया गया।
शशिकांत मिश्र बताते हैं कि प्रत्यूष का 19 वर्ष की आयु में ही मोलिक्यूलर कैमिस्ट्री में पहला शोधपत्र अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हो चुका था। शोध पत्रों के प्रकाशन के आधार पर ही उसे दक्षिण कोरिया में आमंत्रित किया गया है। वह इनदिनों पीएचडी कोर्स पूरा करने के लिए दक्षिण कोरिया में है, जहां उल्सन नेशनल इंस्टीट्यूट ने सितंबर 2015 से अगस्त 2017 तक 13 लाख 40 हजार रुपये प्रतिमाह स्कॉलरशिप देने की घोषणा की है। शिक्षक श्री मिश्र की एक बेटी भी है, जो लखनऊ में बीए ऑनर्स की छात्रा है।