फार्मेसिस्टों ने सात सूत्री मांगें लंबित रखने के विरोध में डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन के प्रांतीय आह्वान पर सोमवार से बांहों पर काली पट्टियां बांधकर सरकार से विरोध जताना शुरू कर दिया। जिला अस्पताल में भोजनावकाश के दौरान फार्मेसिस्टों ने बैठक करके एकजुटता बनाए रखने का संकल्प लिया।
डिप्लोमा फार्मेसिस्ट वेतन विसंगतियों के निराकरण, एक जनवरी 2006 से पुनरीक्षित वेतन लाभ देने, संवर्ग के पुनर्गठन, उप स्वास्थ्य केंद्रों पर फार्मेसिस्टों की तैनाती, राजपत्रित अवकाशों में कार्य के बदले एक माह के अतिरिक्त वेतन भुगतान, रिक्त पदों पर नियुक्तियां करने आदि मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। इस संबंध में प्रांतीय नेतृत्व शासन स्तर पर कई बार ज्ञापन भी दे चुका है। बावजूद इसके कोई सुनवाई नहीं होने पर प्रदेश पदाधिकारियों ने चरणबद्घ विरोध कार्यक्रम की घोषणा कर दी।
आंदोलन केपहले चरण में एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डॉ. जेडी बंसल और महामंत्री डॉ. सुभाष कनौजिया के संयुक्त नेतृत्व में फार्मेसिस्टों ने बांहों पर काली पट्टियां बांधकर सरकार के खिलाफ आक्रोश जताया। खास यह रहा कि विरोध की शुरुआत के बावजूद फार्मेसिस्ट संवर्ग काम पर डटा रहा। इस कारण जिला अस्पताल के मेडिसिन स्टोर से लेकर डिस्पेेंसरी तक कोई काम प्रभावित नहीं हुआ। इस मौके पर एसोसिएशन के मंडलीय सचिव डॉ. अजय नागर ने कहा कि फार्मेसिस्टों की एकजुटता सरकार को झुकने पर मजबूर कर देगी। जिलाध्यक्ष डॉ. बंसल ने कहा कि जिले में 110 फार्मेसिस्ट होने चाहिए, लेकिन तमाम पद खाली पड़े होने से केवल 70 फार्मेसिस्ट चिकित्सा व्यवस्था की रीढ़ बनकर क्षमता से अधिक काम कर रहे हैं। इस दौरान डॉ. एएल वर्मा, डॉ. ओएस कनौजिया, डॉ. एके त्रिपाठी, डॉ. राम विलास, डॉ. सुरेश कुमार आदि मौजूद रहे।
फॉर्मेसिस्टों का आंदोलन कार्यक्रम
0 22 फरवरी तक काला फीता बांधकर विरोध
0 23 से 28 फरवरी तक दो घंटे अधिक करेंगे काम
0 आठ से 13 मार्च तक दो घंटे का कार्य बहिष्कार
0 14 मार्च को द्वितीय शनिवार का सामूहिक उपभोग
0 आठ अप्रैल को डीजी हेल्थ दफ्तर केसामने धरना