बिजली कटौती को लेकर सीएम का वादा हो या फिर जनप्रतिनिधियों का दावा, जिले की जनता को रात अंधेरे में ही गुजारनी पड़ रही है। भीषण गर्मी में रात की कटौती से बुरी तरह परेशान हो चुकी जनता का सब्र जब जवाब दे गया तो वह सड़क पर उतर आई और आननफानन में रात की कटौती की बंद कर दी गई। अब फिर शहर में रात की कटौती शुरू हो गई है और जनता परेशान हो रहा है। वहीं लगातार मांग करने के बाद भी रमजान के दौरान रात्रि कटौती बंद नहीं हुई। ऐसे में रोजेदारों को अंधेरे में सहरी करनी पड़ रही है और लोगों में गुस्सा बढ़ रहा है। रमजान माह में रात को होने वाली बिजली कटौती से निजात पाने के लिए कई व्यापार संगठनों समेत सामाजिक संस्थाओं की ओर से पॉवर कारपोरेशन के अधीक्षण अभियंता कार्यालय में धरना-प्रदर्शन कर अफसरों का घेराव किया था। फिर भी बिजली सप्लाई में सुधार नहीं हो सका। बिना बिजली भीषण गर्मी और उमस का सामना करना सब पर भारी पड़ रहा है। लोग बीमार भी हो रहे हैं लेकिन जनता की सुध कोई नहीं ले रहा है। डीएम पुष्पा सिंह के निर्देश पर अधीक्षण अभियंता आरके अग्रवाल ने बीते सप्ताह एमडी समेत लखनऊ सिस्टम कंट्रोल के प्रभारी एक्सईएन को पत्र भेजकर दिन और रात में चार घंटे की नियमित कटौती के अलावा घंटों की इमरजेंसी रोस्टरिंग से भड़क रहे जनरोष का हवाला दिया गया लेकिन नतीजा शून्य रहा। कटौती के निर्धारित रोस्टर को अनदेखा करके दिन और रात मनमाने तरीके से बिजली काटी जा रही है।
शहरी क्षेत्र में रोजाना दो चरणों में दो-दो घंटे की कटौती लागू है, लेकिन पांच से सात घंटे बिजली गुल रहना आम बात हो गई है। फाल्ट के कारण बिजली संकट से प्रभावित क्षेत्रों को तत्काल बाद होने वाली कटौती से मुक्त रखे जाने का प्रावधान है लेकिन ऊर्जा संकट के बहाने अघोषित कटौती थोपे जाने से लोग रात में चैन की नींद नहीं ले पाते और इससे उनकी दिनचर्या प्रभावित हो रही है।
फाल्ट रोकने को बदले 35 ट्रांसफार्मर
मनमानी कटौती झेल रहे लोगों को क्षेत्र में कोई लाइन फाल्ट अथवा ट्रांसफार्मर खराब होने पर बिजली संकट चिढ़ाने लगता है। कटौती के बाद बिजली सप्लाई चालू होते ही लाइनों पर एकाएक लोड अधिक पड़ने से पूरा नेटवर्क हीटअप होने लगता है और अंतत: लाइन ब्रेकडाउन हो जाती है। इन हालातों से बचने के लिए शहर में विभिन्न स्थानों पर 35 नए ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं लेकिन कटौती के आगे अफसर भी बेबस हैं।
संगठनों के विरोध और रमजान के मद्देनजर रात में कटौती बंद कराने के लिए मुख्यालय को पत्र भेजे गए लेकिन रोस्टरिंग शेड्यूल में बदलाव के संकेत नहीं मिले। कई जिलों का एक जैसा रोस्टर बनाए जाने से शाहजहांपुर को अलग कराना कठिन हो रहा है। जितनी बिजली मिल रही है उसमें कोई फाल्ट आड़े नहीं आए, इसकी कोशिश हो रही है। - विवेक पटेल, एक्सईएन सिटी, पॉवर कारपोरेशन