फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

थक गई मिट्टी, आलू को चेचक हो गया

Tue, 19 Jan 2016 12:03 AM IST
अमर उजाला, शाहजहांपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
पुवायां तहसील क्षेत्र के खेतों की माटी थककर चूर हो चुकी है और एक के बाद एक नई फसल लेने से मिट्टी को पोषक तत्वों को रिचार्ज करने का मौका नहीं मिल पा रहा है। नतीजन, कैल्शियम और बोरान सरीखे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी हो गई है और आलू की फसल चेचक की चपेट में आ गई। यह समस्या पिछले सात वर्ष से है। वजह जानने को कृषि रक्षा विभाग ने मृदा परीक्षण कराया तो यह तथ्य सामने आया है। इस रोग में पौधे की जड़ में उगने वाले आलू के दाने दागदार और गड्ढेदार हो जाते हैं एवं चेचक की दाग सरीखे दिखते हैं। इससे पैदावार करीब 40 से 60 फीसदी तक प्रभावित हो जाती है। जिला उद्यान विभाग के रिकार्ड के अनुसार, जिले में कुल करीब 10.5 हजार हेक्टेयर रकबे में इस बार आलू की खेती हुई है। जिला कृषि रक्षा विभाग के रिकार्ड के अनुसार, सात साल पहले आलू में इस रोग की पहली बार रिपोर्ट पुवायां से ही आई थी। पांच साल पहले से इसके रकबे में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई। यह करीब सौ हेक्टेयर से भी कम भूभाग से शुरू होकर करीब 400 हेक्टेयर में फैल चुका है।
विज्ञापन


विभागीय वर्जन
चेचक रोग से प्रभावित आलू वाले खेतों की मिट्टी में गोबर के खाद का इस्तेमाल नहीं हुआ है और सामान्यतया मौजूद रहने वाले दो सूक्ष्म पोषक तत्व बोरान और कैल्शियम शून्य हो गए। इससे फसल अविकसित रह गई। जिन खेतों में यह रोग दिखा है, अगले साल उसमें आलू की फसल ना बोएं। बताए गए उपचार को अपनाएं और दो फसलों के बीच जुताई-बुवाई में गैप रखें।
विज्ञापन

राधाकृष्ण यादव
जिला कृषि रक्षा अधिकारी

यह करें उपचार
- तात्कालिक तौर पर कैल्शियम नाइट्रेट 10 ग्राम प्रति लीटर और आधा ग्राम बोरान प्रति लीटर मिलाकर हफ्ते में दो से तीन बार छिड़काव कर दें
- अगली फसल लेने से पहले खेत को माह-दो माह का विराम अवश्य दें।
- इस विरामकाल में ट्राइकोडर्मा ढाई किलो प्रति हेक्टेयर गोबर के खाद में मिलाकर प्रभावित खेतों में डालें।
- जिप्सम दो कुंतल प्रति हेक्टेयर डालें।

प्रभावित किसानों का वर्जन
1. फोटो नंबर 24
आलू को चेचक लगने से पूरी फसल नष्ट हो गई है। बची-खुची फसल से लागत निकालनी मुश्किल हो जाएगी।
- राजा बरौना पुवायां

2. फोटो नंबर 25
आलू को चेचक होने की वजह कोई बता नहीं पा रहा और ना ही निदान बताए जा रहे हैं। ऐसे में तो आलू की खेती से तौबा करना ही एकमात्र रास्ता दिख रहा है।
-- महेंद्रपाल सिंह यादव, गांव लालपुर, पुवायां

3. आलू में लगे चेचक रोग को देखते हुए पारंपरिक दवाएं छिड़की गईं लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ है। आलू बेकार हो गए हैं और लागत मिलना भी दूर की कौड़ी है।
- तारा सिंह, एमएम फार्म गुटैया, पुवायां
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें