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Shahjahanpur News: तीन दशक की लगन से कवि चंदन ने तैयार किया मधुवन

Sun, 29 Dec 2024 01:10 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
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जलालाबाद के ग्राम गुरुगवां ​स्थित मधुवन में मौजूद कवि चंन्द्रपाल। संवाद
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जलालाबाद। अपनी ओजपूर्ण रचनाओं से लोगों में जोश का संचार करने वाले कवि चंद्रपाल सिंह चंदन सामाजिक सरोकार का दायरा बढ़ाकर पर्यावरण की सुरक्षा में भी अपना योगदान दे रहे हैं। गुरगवां में तीन दशक की कड़ी मेहनत से उन्होंने सात एकड़ में औषधीय और विलुप्त हो रहीं दुर्लभ प्रजातियों के पौधे उगाकर ऐसा मधुवन तैयार किया है जो किसी हरे-भरे जंगल और जैव विविधता पार्क जैसा एहसास कराता है।
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चंद्रपाल का शुरू से कवि कर्म से लगाव रहा है। कविता लेखन और विभिन्न मंचों पर काव्य पाठ भी करते हैं, लेकिन जंगल उगाने की प्रेरणा उन्हें वर्ष 1985 में आई एक रिपोर्ट पढ़ने से मिली। रिपोर्ट में ओजोन परत के लगातार क्षरण से भविष्य में मानवता के लिए बड़ा खतरा बताया गया। वह बताते हैं कि इसी रिपोर्ट ने उन्हें पर्यावरण की सुरक्षा के लिए स्वयं आगे बढ़ने को प्रेरित किया। उन्होंने अपनी 24 बीघा जमीन पर पौधे लगाने की शुरुआत कर दी। उनके प्रयासों से प्रभावित होकर तत्कालीन डीएम ने पास में ही नवीन परती की खाली पड़ी तीन एकड़ जमीन वन क्षेत्र के नाम से उन्हें पट्टा पर दे दी। बाद में इस जमीन पर भी पौधरोपण का कार्य शुरू कर दिया।

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कोरोना काल में नीम की गिलोय से मिली पहचान
पर्यावरण संरक्षण के प्रति कवि चंदन का जुनून ही है कि उनके मधुवन में सैकड़ों पेड़ बड़े हो जाने के बाद भी वह वहां प्रतिदिन किसी नए पौधे का रोपण करते हैं। पेड़ों की देखभाल को वह परिवार सहित रोजाना पांच- छह घंटे मधुवन में बिताते हैं। मधुवन में गूलर, लभेडा, सागौन, महोगनी, बहेड़ा, महुआ, जंगल जलेबी, इमली, आंवला आदि प्रजातियों के अलावा औषधीय श्रेणी के तमाम पेड़ तैयार हो चुके हैं, लेकिन उन्हें नीम की गिलोय से कोरोना काल में खास पहचान मिली। उन्होंने मधुवन में नीम के वृक्षों पर गिलोय की लताएं बाड़ के रूप में तैयार की हैं। कवि चंदन के अनुसार गिलोय शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और बुखार को भगाने में रामबाण है। कोरोना काल में उन्होंने नीम की गिलोय जनपद समेत अन्य राज्यों में वितरित कराई। इसके लिए उन्हें पंतनगर के कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने सम्मानित भी किया। कृषि विभाग की ओर से हाल ही में चौधरी चरण सिंह की जयंती पर हुए कार्यक्रम में भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। मधुवन में पेड़-पौधों के साथ वह जैविक विधि से कई तरह की सब्जियां भी पैदा करते हैं।
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