शाहजहांपुर। कोविडकाल में लोगों को रोजगार करने के लिए शुरू की गई पीएम स्वनिधि योजना के तहत ऋण लेने वाले 24935 लोगों ने राशि वापस नहीं की है। इनके ऊपर 33 करोड़ 85 लाख 50 हजार रुपया बाकी हैं। लीड बैंक के अनुसार, करीब 83.63 प्रतिशत लोगों ने धनराशि वापस नहीं की है। यह लोग अब ढूंढे नहीं मिल रहे हैं।
जिले में अब तक 28,903 रेहड़ी-पटरी वालों को करीब 40 करोड़ 48 लाख 30 हजार करोड़ का ऋण बांटा गया है। सन 2019 में शुरू की गई पीएम स्वनिधि योजना के तहत रेहड़ी-पटरी को रोजगार के लिए ऋण दिया गया। उस समय 20632 लोगों ने आवेदन किया था। जिसमें 20515 लोगों को ऋण स्वीकृत कर धनराशि का भुगतान कर दिया गया।
दूसरे चरण में वर्ष 2020-21 में 20-20 हजार के ऋण के लिए 7382 लोगों ने आवेदन किया। इसमें से 7324 लोगों को 20 हजार का ऋण स्वीकृत किया गया। तीसरे चरण में 50-50 हजार के ऋण के लिए 11114 लोगों ने आवेदन किया। इसमें 1064 लोगों को पांच करोड़ से अधिक का ऋण दिया गया।
लीड बैंक के अनुसार, रोजगार करने के लिए कर्ज लेने वाले 83.63 प्रतिशत लोगों ने ऋण का भुगतान नहीं किया है। तीनों चरणाें में 28,903 लोगों को ऋण बांटा गया। तीनों चरणों में करीब 24935 हजार लोगों पर 33 करोड़ रुपये का बाकी हैं। सिर्फ 3,968 लोगों ने ईमानदारी से ऋण जमा किया है।
जो पते लिखे उनपर नहीं मिल रहे लोग
आवेदकों ने बैंकों में कागजात भी लगाए थे। अब उन पतों पर वह नहीं मिल रहे हैं। रिकवरी एजेंट के पहुंचने पर उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में बैंक के अधिकारियों ने डीएम को जानकारी दी है। ऐसे लोगों के राशन कार्ड तलाशने की कोशिश शुरू की गई है। माना जा रहा है कि वे कोटेदार से राशन अवश्य ले रहे होंगे।
मामला एक
कोविड के बाद फिर पहुंच गया दिल्ली
नवनीत कोविडकाल में शाहजहांपुर वापस आ गए। उन्होंने रेहड़ी लगाने के लिए 10 हजार रुपये का ऋण लिया। हालात सामान्य होने पर वह वापस दिल्ली चले गए। बैंक कर्मी उनको तलाश कर रहे हैं, लेकिन अब वह मिल नहीं रहे।
मामला दो
सब्जी की फेरी लगाई, फिर पंजाब वापस गए
विनोद कोविडकाल में पंजाब से घर वापस आ गए। उन्होंने सब्जी के फेरी लगाने के लिए बैंक से ऋण लिया। कारोबार ढंग से चला नहीं। इसके बाद वह फिर पंजाब चले गए। अब उनका पता नहीं लगा रहा। बैंक कर्मी तलाश कर रहे हैं।
तीन वर्ष बंद रहने के बाद दोबारा शुरू हुई योजना
योजना में पहले लाभार्थी को रोजगार के लिए 10 हजार रुपये का ऋण दिया जाता है। इसको समय से वापस करने पर अगले चरण में 20 हजार रुपये दिए जाते हैं। इसको भी सही से वापस करने पर 50 हजार रुपये का ऋण दिया जाता है। आंकड़ों के अनुसार, जिले में ऐसे कुल 3,968 लोग है जिन्होंने ईमानदारी से ऋण जमा करके अपना कारोबार चलाया। इस योजना में अब पहली बार ऋण लेने पर 15 हजार, दूसरी बार लेने पर 25 हजार और तीसरी बार लेने पर 50 हजार रुपये दिए जाते हैं।
बैंक का कर्ज वापस नहीं करने वालों की तलाश की जा रही है। जिले में करीब 83 प्रतिशत लोगों ने ऋण की राशि अदा नहीं की है। वसूली के लिए बैंक की तरफ से राशनकार्डों के आधार पर वसूली की जाएगी।
- आरआर तिवारी, लीड बैंक प्रबंधक