मिर्जापुर के ग्राम मौजपुर में रामगंगा नदी के कटान क्षतिग्रस्त हुआ मंदिर। स्रोत: जागरूक पाठक
मिर्जापुर। रामगंगा नदी में पानी सामान्य से अधिक होने के कारण उसके तेज बहाव से तटवर्ती गांवों में कटान थम नहीं रहा है। नदी से हो रहे कटान की मार अब धार्मिक धरोहरों पर भी पड़ने लगी है। रामगंगा के किनारे बसे मौजमपुर गांव के प्राचीन शिव मंदिर के पास नदी की तेज धारा नीचे की मिट्टी अपने साथ बहा रही है। इस कारण मंदिर के कई पिलर रविवार की रात क्षतिग्रस्त हो गए।
सिंचाई विभाग के ठेकेदार कटान वाले हिस्सों में मजदूरों से बंबू क्रेट में ईंट से भरे जियो बैग डालने का काम करा रहे हैं, लेकिन अस्थायी ठोकरें भूमि कटान रोकने में नाकामयाब साबित हो रहीं हैं। मौजमपुर के ग्रामीणों ने बताया कि गांव के किनारे यह मंदिर कई दशक पुराना और न केवल गांव के लोगों बल्कि आसपास के गांवों के ग्रामीणों की आस्था का केंद्र है।
दो माह पहले बाढ़ आने से पूर्व रामगंगा मंदिर से काफी फासले पर बह रही थी, लेकिन बाढ़ उतरने के बाद कटान शुरू होने पर नदी की धारा मंदिर के बिल्कुल पास पहुंच गई है। रविवार की रात मंदिर के किनारे की मिट्टी कटान के दायरे में आई तो आगे के दो पिलर क्षतिग्रस्त हो गए और उनमें दरारें आ गई हैं।
मंदिर के पीछे वाले आधार स्तंभ क्षतिग्रस्त हुए तो मंदिर का अस्तित्व बचाए रखना कठिन हो जाएगा। उन्होंने कटान रोकने के लिए तत्काल ठोस उपाय किए जाने की जरूरत बताई।
उधर, पहाड़पुर गांव में नदी की तेज धारा से भूमि कटान नहीं थम सका। वहां बंबू क्रेट डूब चुकी हैं, लेकिन सिंचाई विभाग के ठेकेदार और मजदूर ग्रामीणों के सहयोग से अस्थायी ठोकरों को मजबूती देने के प्रयास में जुटे हैं। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता सत्यपाल सिंह का कहना है कि पहाड़पुर में कटान रोकने में कामयाबी मिल गई है, लेकिन गांव में पूर्व और वर्तमान प्रधान की गुटबाजी के कारण कुछ ग्रामीण कटान होने का दुष्प्रचार कर रहे हैं।
उनका कहना है कि मौजमपुर गांव में मंगलवार को मंदिर के पास हो रहे कटान का जायजा लेकर आवश्यक बचाव कार्य कराए जाएंगे।