होठों पर अंगुली रखकर शांति का संदेश दे गए थे महात्मा गांधी
-16 अगस्त 1946 को कलकत्ता जाते समय शाहजहांपुर में तीन मिनट रुके थे गांधी जी
-इतिहासकार डॉ. नानक चंद्र मेहरोत्रा को 14 वर्ष की आयु में बापू के दर्शन का मिला था सौभाग्य
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। यह बात 16 अगस्त 1946 की है। उस समय कलकत्ता (अब कोलकाता) के नोआखाली में सांप्रदायिक दंगे शुरू हो गए थे। कत्लेआम के बीच महात्मा गांधी शांति और सद्भाव का संदेश देने के लिए वहां जाने के लिए निकले थे। उनकी ट्रेन शाहजहांपुर से होकर जानी थी। गांधी जी के आने की सूचना पर हजारों लोग दर्शन करने के लिए उमड़ पड़े थे। इसमें हर वर्ग के लोग शामिल थे। गांधी जी जिंदाबाद के नारों से पूरा माहौल गूंज रहा था। गांधी जी की ट्रेन आकर रुकी। महात्मा गांधी ट्रेन की बोगी के दरवाजे पर आए। उन्होंने होठों पर उंगली रखकर हिंदू और मुसलमानों को एकजुटता और शांति का संदेश दिया था। तीन मिनट रुकने के बाद ट्रेन आगे के लिए रवाना हो गई।
मशहूर इतिहासकार डॉ. नानक चंद्र मेहरोत्रा ने उस दिन गांधी जी को काफी करीब से देखा था। तब उनकी आयु मात्र 14 वर्ष थी। जब गांधी जी की ट्रेन यहां से गुजरी थी। तब डॉ. एनसी मेहरोत्रा के अलावा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बसंत लाल खन्ना भी स्टेशन पर मौजूद थे। मेहरोत्रा बताते हैं कि उस समय रेलवे स्टेशन पर सिर्फ एक प्लेटफार्म हुआ करता था। लोगों की भीड़ को देखकर गांधी जी बोगी के गेट पर आए। वह सफेद धोती पहने थे। हाथ में लाठी और कमर में घड़ी लटकी थी। भीड़ उनका स्वागत करना चाहती थी, लेकिन उन्होंने होठों पर अंगुली रखकर संदेश दिया था।
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खिलाफत मैदान में की थी सभा
गांधी जी ने 16 अक्तूबर 1920 को खिलाफत मैदान में सार्वजनिक सभा की थी। डॉ. एनसी मेहरोत्रा बताते हैं कि उस समय ताजूखेल में आईने वाली मस्जिद के पास और बहादुरगंज में मशीनरी मार्केट के मैदान में सभाएं होती थीं। दोनों स्थान खिलाफत मैदान के नाम से जाने जाते थे। मेहरोत्रा ने बताया कि गांधी जी जब मंच पर आए तो उनके पैर छूने के लिए लोगों में होड़ सी लग गई थी। उनके साथ मौलाना मुहम्मद अली भी थे।
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1929 में दो बार जनपद में आए थे गांधी जी
-वर्ष 1929 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी दो बार शाहजहांपुर आए थे। इतिहासकार नानक चंद्र मेहरोत्रा ने बताया कि पहली बार 11 अक्तूबर 1929 को गांधी जी यहां आए थे। तब वह छह घंटे रुके थे। इस दौरे में गांधी जी ने केवल कांग्रेस कार्यकर्ताओं से भेंट की। इसके बाद 11 नवंबर को 1929 को दूसरी बार आए महात्मा गांधी जनपद में आए थे। उनके साथ पत्नी कस्तूरबा गांधी, मीरा बेन, जेबी कृपलानी थे। सभी आर्य समाज में रुके थे। तब गांधी जी ने टाउनहाल में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित किया था। अपने भाषण में उन्होंने जनता से खादी को ग्रहण करने का आह्वान किया था।
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फोटो नंबर 2
-गांधी जी के रेलवे स्टेशन पर आने की सूचना मिलने पर हम भी गए थे। उस समय सिर्फ तीन मिनट ही ट्रेन रुकी थी। तब 14 वर्ष की आयु में महात्मा गांधी के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था।
डॉ. एनसी मेहरोत्रा, वरिष्ठ इतिहासकार
आज सुबह 11 बजे दो मिनट का मौन
महात्मा गांधी के बलिदान दिवस पर 30 जनवरी को सुबह 11 बजे दो मिनट का मौन धारण किया जाएगा। जहां कहीं संभव हो, दो मिनट के मौन की अवधि शुरू होने तथा समाप्त होने की सूचना सायरन/हूटर बजाकर या आर्मी गन से दी जानी चाहिए। सायरन/हूटर 10.59 से 11.00 बजे तक बजाए जाने चाहिए और दो मिनट के बाद 11.02 बजे से 11.03 बजे तक पुन: क्लियर सायरन/हूटर को बजाया जाना चाहिए।