भीषण गर्मी में मरीजों से जिला अस्पताल भर गया है। मरीजों के लिए बेड कम पड़ रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि सीएचसी और पीएचसी पर मरीजों का मामूली बीमारियों का इलाज न करके उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। जिससे जिला अस्पताल में ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
जिला संयुक्त चिकित्सालय में तीन सौ बेड हैं। जिसमें सौ बैड महिला अस्पताल के लिए हैं। आम दिनों में रोजना 40 से 50 मरीजों के भर्ती होते हैं, जबकि 20 से से 25 मरीजों की छुट्टी भी हो जाती है। गर्मी का सीजन शुरू होने की वजह से अस्पताल में डायरिया, पेट से संबंधित बीमारियों के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। पिछले तीन-चार दिनों में औसतन 70 से 80 मरीज भर्ती हो रहे हैं। जिससें जिला अस्पताल में बेड फुल हो गए हैं। अस्पताल प्रशासन को मरीजों को भर्ती करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गंभीर मरीजों को भर्ती करने के अस्पताल में भर्ती मरीजों की जल्दी छुट्टी करनी पड़ रही है।
सीएचसी और पीएचसी में नहीं मिलती दवाई
ग्रामीण क्षेत्र में बनी सीएचसी और पीएचसी में सरकारी डॉक्टर तैनात है। सब जगह दवाई भी उपलब्ध है, लेकिन वहां के डॉक्टर मरीज को जिला अस्पताल रेफर कर देते है। मामूली बुखार, डायरिया और पेट दर्द की दवाई भी नहीं देना चाहते है। मामूली घायल लोगों को भी जिला अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। जिससें जिला अस्पताल पर लगातार बोझ बढ़ रहा है।
एंबुलेंस का भी होता है दुरुप्रयोग
हादसे में मामूली रूप से घायल हुए लोगों का सीएचसी और पीएचसी पर भी इलाज हो सकता है, लेकिन यहां से मरीजा को रेफर करके 108 एंबुलेंस सेवा से जिला अस्पताल भेज दिया जाता है।
अस्पताल में लगातार बैड भरे चल रहे है। मरीजों को संख्या लगातार बढ़ रही है। सीएचसी और पीएचसी पर मामूली बीमारियों का इलाज नहीं होने की वजह से अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
- डॉ. यूपी सिन्हा, प्रभारी सीएमएस