जैसे-जैसे दिन गुजरते जा रहे हैं, वैसे-वैसे बोर्ड परीक्षा की कापियों का बहिष्कार औपचारिक होता जा रहा है। शर्मा गुट के बाद शनिवार को माध्यमिक शिक्षक संघ पांडेय गुट ने भी बहिष्कार से हाथ खींच लिए। अब केवल माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा ही मैदान में बची है।
सुबह को महासभा के पदाधिकारी तीनों मूल्यांकन केंद्रों (जीआईसी, इस्लामिया और एबी रिच कॉलेज) पर नारेबाजी कर लौट आए। वहीं, यह भी पता चला है कि तमाम वित्तविहीन शिक्षक भी गुपचुप ढंग से उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर रहे हैं। अब अपने ही घर के विभीषणों से कैसे निपटा जाए। यह बात जरूर विचार करने योग्य है। वैसे अभी तीनों केंद्रों पर आधे परीक्षक भी नहीं पहुंच रहे हैं, जिससे निर्धारित समय में कापियाें का मूल्यांकन पूरा नहीं हो सकता। अकेले जीआईसी में ही छह सौ से अधिक परीक्षकों का टोटा बना हुआ है। वहीं, हाई स्कूल के दोनों केंद्रों पर भी लगभग 400 शिक्षकों की अभी और जरूरत महसूस की जा रही है। पांडेय गुट के संघर्ष समिति के संयोजक अनिल मालवीय, जिलाध्यक्ष राजेश शर्मा और मंत्री गौरव पांडेय ने बताया कि मूल्यांकन बहिष्कार बंद कर इसकी सूचना प्रदेश अध्यक्ष को भेज दी गई है।
हाई स्कूल के मूल्यांकन केंद्र इस्लामिया इंटर कॉलेज के सह उपनियंत्रक मिनहाज अख्तर ने बताया कि उनके केंद्र पर शनिवार को 28 टोलियों के माध्यम से 152 परीक्षकों ने लगभग साढ़े तीन हजार कापियां चेक कीं। वहीं, एबी रिच इंटर कॉलेज के उप नियंत्रक आरपी राम ने बताया कि उनके यहां 13 टोलियां शुरू हो चुकी हैं, जिसमें करीब सवा शिक्षकों ने मूल्यांकन किया। उनके यहां अभी लगभग 200 परीक्षकों की कमी बनी हुई है।
जीआईसी में चल रहे इंटर के मूल्यांकन केंद्र पर 54 टोलियां बन चुकी हैं, जबकि अभी 30 टोलियां और बननी है। इतना ही नहीं 886 परीक्षकों के सापेक्ष मात्र ढाई सौ परीक्षक ही काम कर रहे हैं, इस तरह अभी छह से अधिक शिक्षकों की केंद्र पर जरूरत हैं।