तिलहर (शाहजहांपुर)। पॉलिथीन को लेकर जिले में कसे शिकंजे पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक वैज्ञानिक की टीम ने जिस तरह से पलीता लगाने की कोशिश की उस पर जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी खपा हो गए। डीएम के निर्देश पर एडीएम ने जांच में गलत व्याख्या किए जाने पर सहायक वैज्ञानिक को तलब करते हुए पुन: जांच के निर्देश दिए। एडीएम नरेंद्र कुमार के निर्देश पर शुक्रवार देर शाम पॉलिथीन व्यापारी की दुकान पर पहुंचे सहायक वैज्ञानिक की टीम ने उसी पॉलीथिन की जांच कर अवैध बताते हुए पांच हजार रुपये का जुर्माना वसूल किया।
अधिकारियों की लताड़ के बाद शुक्रवार रात लगभग नौ बजे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक वैज्ञानिक पीसी कनौजिया आधा दर्जन टीम के साथ तिलहर नगर पालिका पहुंचे। यहां से टीम के साथ स्टेशन रोड स्थित पॉलिथीन व्यापारी जितेंद्र कुमार गुप्ता की दुकान पर पहुंचने से पहले ही भाजपा नगर अध्यक्ष संजय गुप्ता, भाजपा नेता राजीव राठौर आदि ने जांच अधिकारियों को रोकते हुए उन्हें आड़े हाथों लिया। भाजपा नेताओं ने जांच के बाद दोबारा आने का कारण पूछा तब पीसी कनौजिया ने बताया कि वह के एडीएम के आदेश पर पुन: जांच करने आए हैं। इस बात पर भाजपा और व्यापारी नेताओं ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा व्यापारी को बेवजह क्यों परेशान किया जा रहा है। टीम के समझाने बुझाने के बाद भाजपा नेता शांत हुए। दुकान पहुंचने पर पीसी कनौजिया ने पॉलिथीन निकलवाकर जांच करना शुरू कर दी। जांच के दौरान दुकान पर भीड़ लग गई। जांच में एक पॉलिथीन 50 माइक्रोन से कम पाए जाने पर जब जुर्माने की बात आई तो बात फिर बिगड़ गई। इस बीच पीसी कनौजिया ने दुकान का शटर आधे से अधिक बंद कराते हुए व्यापारी तथा भाजपा नेता से कुछ गुफ्तगूं की इसके बाद जांच अधिकारी ने पॉलीथिन के ढेर से मात्र एक किलो पॉलिथीन लेते हुए पांच हजार रुपया जुर्माना वसूलने की रसीद काटकर पल्लू झाड़ लिया। टीम में सहायक वैज्ञानिक एसएन चौहान,फील्ड सहायक एसबी द्विवेदी, एसपी नारायण व लैव इंचार्ज करण पाल मौजूद रहे।
बयान से पलटे सहायक वैज्ञानिक
सोमवार को व्यापारी की दुकान पर पॉलिथीन चेक करने आए सहायक वैज्ञानिक पीसी कनौजिया शनिवार को अपने बयान से पलट गए। उन्होंने कहा कि पॉलिथीन को लेकर शासनादेश को ठीक से पढ़ा नहीं था केंद्र सरकार के द्वारा जारी दिशा निर्देश को देखने के बाद दोबारा जांच में आना पड़ा है। मात्र एक किलो पॉलिथीन पर जुर्माना वसूलने के संबंध में जांच अधिकारी कोई जवाब नहीं दे सके।
एडीएम के निर्देश पर छोड़ी गई पॉलिथीन की पुन: जांच करने आए थे। जांच में एक पॉलिथीन 50 माइक्रोन से कम की पाई गई है उस पर पांच हजार रुपये जुर्माना वसूला गया है।
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अधिकारियों को अपनी नीति स्पष्ट रखनी चाहिए। रोज नया शासनादेश लेकर अधिकारी खड़े हो जाते हैं, यह गलत है। जिस पॉलिथीन को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पीसी कनौजिया वैध लिखित रूप में कह कर गए हैं फिर दोबारा कर उसी पॉलिथीन को अवैध बताकर जुर्माना कर रहे हैं। यह गलत है और व्यापारियों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है यह ठीक नहीं है।
संजय गुप्ता ,नगर अध्यक्ष भाजपा
2 अक्तूबर 2018 से सरकार ने पॉलिथीन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है। इस आदेश में माइक्रोन का कोई जिक्र नहीं किया गया है। पैकिंग वाली पॉलिथीन पर कंपनी द्वारा अधिकृत मोहर लगी रहती है। लेकिन अन्य पॉलिथीन पूर्णतया प्रतिबंधित है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक वैज्ञानिक पीसी कनौजिया ने पहले गलत व्याख्या की थी लेकिन उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ है।
सर्वेश कुमार कुशवाहा, ईओ,नगर पालिका परिषद