शाहजहांपुर। चीनी मिलों मेें अगले माह से आरंभ होने वाले पेराई सत्र 2019-20 के लिए 1.70 लाख से ज्यादा किसानों ने 98522 हेक्टेयर में गन्ना की बुवाई की है। विभागीय पर्यवेक्षक मई से जुलाई माह के बीच उनके सट्टा भी बना चुके हैं। बीते माह सट्टा के सत्यापन मेें लगभग तीन हजार ऐसे किसानों की छटनी की जा चुकी है, जिन्होंने दो स्थानों से एक ही नाम पर सट्टे बनवा लिए थे। बाद में सत्यापन से शेष बचे किसानों के लिए गन्ना समितियों पर सट्टा प्रदर्शन मेले लगाए गए, लेकिन करीब 10470 ऐसे किसान अभी भी हैं, जो अपने सट्टा का सत्यापन कराने से कन्नी काट गए। गन्ना विकास विभाग को संदेह है कि इनमेें ज्यादातर गन्ना माफिया हो सकते हैं और इसलिए समितियों से उनकी सदस्यता खारिज कर उन पर चीनी मिलों में गन्ना सप्लाई करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
चीनी मिलों में हर साल पेराई सत्र शुरू होने के साथ पर्ची वितरण से लेकर गन्ना आपूर्ति तक किसानों से नाइंसाफी की शिकायतें शुरू हो जाती हैं। पर्ची वितरण में माफिया का हस्तक्षेप रोकने के लिए गुजरे सालों की तरह इस बार भी सर्वे की शुरुआत से पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन किसानों की शिकायतें नहीं थम रहीं इसलिए शासन ने पर्ची वितरण की ऐसी एकीकृत प्रणाली लागू कराने का निर्णय किया है कि सप्लाई टिकट वास्तविक गन्ना उत्पादक को ही मिल सके, लेकिन गन्ना किसान और किसान संगठनों के प्रतिनिधि इस योजना में माफिया की भूमिका को लेकर सशंकित हैं। उनकी शंका जायज भी है क्योंकि हर पेराई सत्र में उनका हस्तक्षेप बढ़ जाता है। इसलिए गत वर्ष की तुलना में इस बार गन्ना रकबा भी नौ फीसदी घट गया है।
डंडिया बाजार में पकड़ा जा चुका अवैध गन्ना सेंटर
दो साल पहले निगोही-तिलहर मार्ग पर डंडिया बाजार में अधिकारियों ने एक बाग मेें माफिया का अवैध गन्ना सेंटर चलाते पकड़ा था। मौके पर मिले दो तौल काटों की जांच कराने पर किसानों से घटतौली भी प्रमाणित हुई थी। गत पेराई सत्र में भी ऐसे कई माफिया समेत सर्वे सट्टा में गड़बड़ी करने में लिप्त पाए गए तीन गन्ना पर्यवेक्षकों के खिलाफ विभिन्न थानों में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इस बार सर्वे सट्टा के समय से ही कई चरणों में जांच होने से फर्जी किसान शायद ही खुलकर सामने आ सकें। ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक भी मानते हैं कि सर्वे सट्टा में बरती गई पारदर्शिता और पर्ची वितरण व्यवस्था राज्य मुख्यालय से नियंत्रित होने से माफिया का हस्तक्षेप थमने के साथ समितियों का कार्य बोझ घटेगा और किसानों से ताजा गन्ना मिलने पर मिलें अधिक चीनी उत्पादन कर सकेंगी।
जिले की तीनों गन्ना समितियों (रोजा, तिलहर एवं पुवायां) में 1.51 लाख किसान पहले से सदस्य हैं। इस वर्ष 9168 नए सदस्य बनाए गए हैं। यह सभी मिलों को गन्ना सप्लाई को अधिकृत होंगे। कई स्तर पर हुई जांच में दो समितियों से सदस्यता लेने वाले 833 और दोहरे सट्टे दर्ज कराने के बावजूद एक ही बैंक खाता दर्ज कराने अथवा डबल आधार कार्ड लगाने वाले 714 किसानों के नाम सदस्यता सूची से डिलीट कर दिए गए हैं। करीब दस हजार से अधिक ऐसे किसान हैं, जिन्होंने सट्टा का सत्यापन नहीं कराया, लेकिन उनमें सभी माफिया नहीं हैं क्योंकि ऐसे किसान जिले मेें संचालित लगभग 40 कोल्हुओं और क्रशरों (लघु शकर संयंत्रों) को गन्ना सप्लाई करते हैं। - डॉ. खुशीराम, जिला गन्ना अधिकारी