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Shahjahanpur News: युवाओं में बढ़ रहा ऑस्टियोपोरोसिस, मामूली चोट से भी हो रहा फ्रैक्चर

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डॉ सरोज कुमार, अस्थि रोग विशेषज्ञ, राजकीय मेडिकल कॉलेज। - फोटो : udhampur news
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शाहजहांपुर। जीवनशैली में तेजी से आए बदलाव के चलते शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। सुबह देर से उठने और बैठे-बैठे कार्य करने से हड्डियां कमजोर हो रहीं हैं। यही वजह है कि मामूली-सी चोट भी फ्रैक्चर का कारण बन रही है। युवा वर्ग इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। ऑस्टियोपोरोसिस से शारीरिक क्षमताओं में कमी और तेज दर्द से जूझना पड़ रहा है।
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राजकीय मेडिकल कॉलेज के अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. सरोज कुमार के मुताबिक पहले कंप्यूटर, मोबाइल आदि टेक्नोलॉजी नहीं थी। अधिकतर कार्य शारीरिक श्रम से होते थे। कार्यालयों में भी फाइलें इधर से उधर ले जाने में चलना-फिरना हो जाता था। अब बिना कुर्सी से उठे सारे कार्य संचालित हो रहे हैं।
युवा वर्ग देर रात तक जाग रहा है और सुबह देर से उठकर अपने-अपने कार्यक्षेत्र में चला जाता है। ऐसे में हड्डियां सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहीं हैं। व्यायाम न करने, खान-पान अनियमित होने, पौष्टिक आहार न लेने और विटामिन-डी की कमी से युवाओं में ऑस्टियोपोरोसिस बीमारी तेजी से बढ़ रही है। इसमें हड्डियां कमजोर और छिद्रपूर्ण हो जाती हैं। इससे मात्र फिसलकर गिरने भर से ही फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।
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लक्षण
-अक्सर कोई शुरुआती लक्षण नहीं जब तक फ्रैक्चर न हो जाए।
-रीढ़ की हड्डी का आगे झुकना।
-कमजोर पकड़ होना।
-गिरने के बाद सामान्य से गंभीर फ्रैक्चर होना।

इलाज और बचाव
-कैल्शियम और विटामिन डी, डेयरी उत्पाद, हरी पत्तेदार सब्जियों, अंडे और सूर्य का प्रकाश का ध्यान रखना चाहिए। वजन उठाने वाले व्यायाम और योग हड्डियों को मजबूत करते हैं। हड्डी के घनत्व का परीक्षण कराना चाहिए। सुबह की धूप में बैठना चाहिए। अंकुरित बीज और मौसमी फल खाएं।

युवाओं की तेजी से बदल रही जीवनशैली से ऑस्टियोपोरोसिस का मर्ज बढ़ा है। यह बीमारी हड्डियों को धीरे-धीरे खोखला कर देती है। नित्य व्यायाम और खान-पान को नियमित करने के साथ-साथ पौष्टिकता भी जरूरी है। अन्यथा की स्थिति में शारीरिक कष्ट सामने आ सकते हैं।
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- डॉ सरोज कुमार, अस्थि रोग विशेषज्ञ, राजकीय मेडिकल कॉलेज।
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