कांट। फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने के आरोप में कोर्ट ने तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी सहित दो लोगों पर रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया है।
गांव हसनपुर रसकूपा निवासी ईश्वरवती ने बताया कि पिता सोनपाल उनके साथ रहते थे। वह पिता की इकलौती संतान हैं। पिता के नाम तिलहर क्षेत्र के गांव बथुआ अक्का में मकान और कुछ जमीन थी। 15 मार्च 2020 को उनके पिता की मौत हो गई।
चाचा लखपत ने पिता के शव का पोस्टमॉर्टम कराया था, इसमें हार्ट अटैक से मौत की पुष्टि हुई थी। चाचा ने पिता की जमीन पर कब्जा करने की नीयत से षडयंत्र रचकर गांव बथुआ अक्का के ग्राम पंचायत अधिकारी से मिलकर पिता सोनपाल का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया। प्रमाणपत्र में मौत का स्थान बथुआ अक्का दिखाया गया था, जबकि उनके पिता की मौत हसनपुर रसकूपा में हुई थी।
चाचा ने प्रचारित करना शुरू कर दिया कि सोनपाल के कोई संतान नहीं है। जानकारी होने पर उन्होंने फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनाए जाने की शिकायत की तो खुद को फंसता देख ग्राम पंचायत अधिकारी ने फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया। ईश्वरवती ने तहरीर दी लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। अधिकारियों को पत्र देने के बाद भी सुनवाई न होने पर उन्होंने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी और लखपत पर रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया है।