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अरे वाह! गुरुजी को बिना काम-धाम तीन महीने का वेतन

Sat, 02 May 2015 12:25 AM IST
शाहजहांपुर
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शैक्षिक सत्र में छेड़छाड़ करके शासन और विभाग ने अभिभावकों की जेब पर ही डाका नहीं डाला, बल्कि अपनी तिजोरी लुटाने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ी। शासन के एक अव्यवहारिक फैसले से जहां अभिभावक तीन माह की अतिरिक्त फीस देने के लिए विवश हैं, वहीं सरकार को 30 जून को सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों को तीन माह का अतिरिक्त वेतन भुगतान भी करना पड़ रहा है। इस व्यवस्था ने एक नए विवाद को भी जन्म दे दिया है।
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सभी जानते हैं कि शिक्षा विभाग में शिक्षकों की सेवानिवृत्ति सत्र के अंतिम दिन यानी 30 जून को ही होती है और यह सिलसिला दशकों से चला आ रहा है। शिक्षक को शैक्षिक सत्र का लाभ इसलिए दिया जाता है कि छात्र-छात्राओं की पढ़ाई का अहित न हो। उसकी सेवानिवृत्ति तिथि चाहें जो हो, लेकिन वर्ष को आधार मानकर 30 जून को ही उसे रिटायर किया जाएगा। यह व्यवस्था तब थी, जब शैक्षिक सत्र पहली जुलाई से 30 जून तक चलता था।
अब शासन ने वित्तीय वर्ष से मेल मिलाते हुए पहली अप्रैल से 31 मार्च तक शैक्षिक सत्र चलाने की घोषणा कर दी। शैक्षिक सत्र बदलने से होने वाले लाभ-हानियों पर विचार शायद नहीं किया गया, इसीलिए अभिभावकों से बीते शैक्षिक सत्र में (2014-15) अप्रैल, मई और जून की वसूली जा रही है, जिससे सभी स्कूल-कॉलेजों में हाहाकार मचा हुआ है। जबकि ये तीनों महीने अब नवीन शैक्षिक सत्र (2015-16) का हिस्सा बन चुके हैं। इन तीन महीनाें की फीस के समायोजन की बात शासनादेश में नहीं जोड़ी गई, जिससे और विवाद खड़ा हो रहा है।
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अब सवाल यह भी है कि यदि शैक्षिक सत्र 31 मार्च को शासन ने खत्म कर दिया और पहली अप्रैल से नया सत्र आरंभ हो गया तो नियमानुसार 30 जून को रिटायर होने वाले शिक्षकों को 31 मार्च को ही सेवानिवृत्त कर दिया जाना चाहिए था। यदि सरकार उनकी तीन महीनों का नुकसान नहीं करना चाहती तो ये तीन महीनें (अप्रैल, मई, जून) नए सत्र में जुड़ रहे हैं, यानी शिक्षकों को एक पूरे सत्र का लाभ तो मिल ही रहा है, वहीं नए सत्र के तीन महीनों का भी अतिरिक्त लाभ दिया जा रहा है। इस तरह शिक्षकों के इन तीन महीनाें की अतिरिक्त सेवाएं जुड़ रही हैं, वह भी रिटायरमेंट के बाद। इस तरह रिटायरमेंट की अंतिम तिथि निकलने के बाद भी तीन महीने की सेवाएं लेने से सरकारी खजाने में सेंध लग रही है। इन बातों का अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं है, क्योंकि शासन की अदूरदर्शिता से यह तो होना ही है।
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