शाहजहांपुर। संचारी रोग के लिहाज से संवेदनशील गांवों के प्रति जिम्मेदार अफसर ही असंवेदनशील बने हुए हैं। सफाई न होने से यहां गंदगी की भरमार है। बजबजाती नालियों में मच्छर पनप रहे हैं। मंगलवार को दो जगह पड़ताल की गई तो हकीकत सामने आ गई। ऐसे में मच्छरों के प्रकोप से डेंगू-मलेरिया फैलने पर गत वर्षों से इस बार खराब हालात हो सकते हैं।
एक से 30 अप्रैल तक संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत 124 गांवों को संवेदनशील की श्रेणी में रखा गया है। इसमें वे गांव शामिल हैं, जिनमें दो वर्षों में डेंगू-मलेरिया का प्रकोप ज्यादा नजर आया। वहां पर अफसर सफाई कराने, एंटी लार्वा का छिड़काव, रोगी मिलने पर उनकी जांच कराने का दावा कर रहे हैं।
हकीकत में गांवों में सिर्फ कागजी खानापूरी हो रही है। कांट ब्लॉक के संवेदनशील गांव गुरथना में तालाब में मच्छर पनपते मिले। सफाईकर्मी के प्रतिदिन नहीं आने से सफाई की व्यवस्था भी चौपट है। नालियां चोक पड़ी हैं। गांव के सरोज और सुनील कुमार ने बताया कि तीन हजार की आबादी वाले गांव में पिछले वर्ष डेंगू और मलेरिया फैला था। इसके बावजूद सफाई या छिड़काव नहीं कराया गया।
तिलहर के गांव कपसेड़ा में 2023 में कई लोग डेंगू-मलेरिया की चपेट में आए थे। गांव संवेदनशील की श्रेणी में होने के बावजूद एंटी लार्वा का छिड़काव शुरू नहीं कराया। गांव में जगह-जगह पानी का भराव व गंदगी है। इससे बीमारी पनपने का खतरा बना है।
आशीष कुमार, राम अवतार, प्रदीप कुमार, रामकुमार ने बताया कि मच्छरों से निपटने के लिए कीटनाशक का छिड़काव नहीं कराया गया। कोई अधिकारी सुनने के लिए तैयार नहीं है। पूर्व के वर्षों में गांव में बीमारियों ने काफी ज्यादा पैर पसारे थे, तब भी खानापूरी ही की गई थी।
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संचारी रोग अभियान के तहत सफाई के लिए रोस्टर बनाया है। संभावना है कि कांट व तिलहर के गांव अभी रोस्टर में नहीं आए हैं। शेष जगह पर कार्य कराया जा रहा है। पानी की व्यवस्था को सीएचसी पर दुरुस्त कराएंगे।
डाॅ. पीपी श्रीवास्तव, एसीएमओ
कांट के गुरथना में गंदगी से भरी नालियां। संवाद- फोटो : संवाद
कांट के गुरथना में गंदगी से भरी नालियां। संवाद- फोटो : संवाद
कांट के गुरथना में गंदगी से भरी नालियां। संवाद- फोटो : संवाद