भावलखेड़ा। थाना रामचंद्र मिशन क्षेत्र में हनुमत धाम के पास खन्नौत नदी के किनारे एक युवक का शव मिलने से सनसनी फैल गई। युवक दो दिनों से लापता था। पुलिस के अनुसार उसके शरीर पर चोटों के निशान पाए गए हैं। जानकारी पाकर पहुंचे परिवार वालों ने शव की शिनाख्त की। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। इधर, परिवार वालों ने युवक के तीन दोस्तों पर हत्या किए जाने का शक जाहिर करते हुए तहरीर दी है। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही रिपोर्ट दर्ज करने की बात कह रही है।
थाना रामचंद्र मिशन क्षेत्र के मोहल्ला नई बस्ती रेती निवासी 35 वर्षीय अमित कुमार 28 अप्रैल की शाम सात बजे मोहल्ले के तीन दोस्तों के साथ घूमने निकला था। भाई सचिन कुमार के मुताबिक अमित देर रात तक वापस नहीं आया तो वे उसके दोस्तों के घर पूछताछ के लिए गए। तब तीनों ने बताया कि वापस आने पर सभी अपने-अपने घर चले गए थे। उन्हें अमित के बारे में जानकारी नहीं है। अमित के मोबाइल पर कॉल की गई तो उसका फोन स्विच ऑफ आ रहा था। अगले दिन 29 अप्रैल को गुमशुदगी दर्ज कराने के लिए थाने में तहरीर दी लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। बृहस्पतिवार को अमित का शव हनुमत धाम के पास खन्नौत नदी के किनारे मिला। शव पर चोटों के कई निशान पाए गए। सूचना पर प्रभारी निरीक्षक थाना रामचंद्र मिशन दीपक शुक्ला ने बताया कि छानबीन कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उधर, भाई सचिन कुमार ने अमित के तीन दोस्तों पर साजिश कर हत्या किए जाने का शक जाहिर करते हुए तहरीर दी है। बताया कि पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर अमित की तलाश शुरू कर दी होती तो हो सकता है उसकी जान बच जाती।
हनुमत धाम के पास युवक का शव बरामद हुआ है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - प्रवीन कुमार, सीओ सिटी, शाहजहांपुर
दिव्यांशु और गजेंद्र पाल हत्याकांड की जांच लंबित, अमित मामले में भी टालमटोल
भावलखेड़ा। थाना रामचंद्र मिशन क्षेत्र में आठ अक्टूबर को मोहल्ला नई बस्ती रेती निवासी दिव्यांशु के गोली मारी गई थी। कई माह बीत जाने के बावजूद भी पुलिस किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है। मामले की जांच अभी लंबित है। 23 नवंबर को रोजा चीनी मिल के यार्ड में थाना रोजा क्षेत्र के सरसवां निवासी गजेंद्र पाल का शव बरामद हुआ था। मृतक का पैर टूटा था और शरीर पर चोटों के निशान थे। मामले में भी पुलिस के हाथ कोई खास सफलता नहीं लगी है। नाकामी छुपाने के लिए पुलिस ने दोनों ही मामलों को आत्महत्या जताना शुरू कर दिया है। अमित के मामले में भी परिवार वालों के तहरीर दिए जाने के बावजूद भी कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। परिवार वालों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने का इंतजार कहकर टाल दिया गया है।