कलान। तहसील क्षेत्र में गंगा और रामगंगा की बाढ़ सिमटने के साथ ही मलेरिया, वायरल बुखार, उल्टी-दस्त आदि जलजनित बीमारियां बढ़ने लगी हैं। नतीजे में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की ओपीडी में मरीजों की संख्या गत सप्ताह की तुलना में करीब तीन गुना बढ़ गई है।
गांवों के आसपास भरा बाढ़ का पानी उतर चुका है, लेकिन निचले इलाकों ओर पोखरों में भरा पानी सड़ांध के साथ बीमारियों को बढ़ावा देने लगा है। नदियों के तटीय गांवों में मलेरिया, वायरल बुखार, पेट दर्द, डायरिया जैसी बीमारियां प्रसार ले रही हैं। इन रोगों से पीड़ित मरीज इलाज के लिए पीएचसी पर ज्यादा पहुंच रहे हैं। हालांकि, उनके स्वास्थ्य की जांच में मलेरिया के मामले कम मिल रहे हैं, लेकिन वायरल बुखार के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। सोमवार को सीएचसी जाने पर वहां मरीजों का जमावड़ा लगा मिला। पर्चा बनवाने और दवा वितरण काउंंटर पर भीड़ में मरीज धक्का-मुक्की करते दिखे।
पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. आर्येंद्र कुमार के अनुसार सामान्य दिनों में ओपीडी में रोजाना लगभग 100 से 150 पर्चे बनते थे, लेकिन गत तीन दिन से रोजाना करीब 400 मरीज आ रहे हैं। इनमें से 50 फीसदी से ज्यादा मरीज वायरल बुखार के हैं। उन्होंने बताया कि मलेरिया और वायरल बुखार के कई लक्षण एक जैसे मिलते हैं, लेकिन मरीजों के खून की नमूनों की जांच में मलेरिया के सप्ताह में सिर्फ एक-दो मामले मिल रहे हैं और इन मरीजों का भी पीएचसी में ही उपचार किया जा रहा है। उनका कहना है कि ऐसे मरीजों को बीमारियों से बचाव के लिए पानी उबालकर पीने और मच्छरों से बचाव करने की सलाह भी दी जा रही है।