तेज हवा के बीच बृहस्पतिवार सुबह नरई जलाते समय गांव बंडी निवासी 82 वर्षीय कामता प्रसाद आग की लपटों के बीच फंस गए और उनकी जलकर मौत हो गई। सूचना पाकर एडीएम एफआर पीके श्रीवास्तव, एसडीएम लालबहादुर सहित कई अधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी की। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम को भेजा है।
मृतक के पुत्र जनार्दन प्रसाद ने बताया कि पिता बृहस्पतिवार सुबह खेत में नरई फूंकने जाने की बात कह रहे थे। उन लोगों ने मना भी किया, लेकिन सुबह करीब नौ बजे वह खेत पर चले गए और नरई के खेत में आग लगा दी। तेज हवा के चलते आग ने थोड़ी ही देर में रौद्र रूप धारण कर लिया और पड़ोस में ओमप्रकाश और प्रभूदयाल के खेतों की नरई तक जा पहुंची। आग की ऊंची लपटें उठती देख आसपास खेतों में काम कर रहे लोगों ने शोर मचाया तो गांव बंडा और धर्मापुर के तमाम लोग मौके पर पहुंच आग बुझाने में जुट गए। इस दौरान आग से गांव धर्मापुर के प्रकाश राठौर और गांव बंडी के महेंद्र मिश्रा के आठ बीघा गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। आग गांव धर्मापुर की ओर बढ़ी तो सभी लोग आगे पहुंचकर आग बुझाने में जुट गए। इस दौरान ओमप्रकाश के खेत में वृद्ध कामता प्रसाद धुंए और आग के बीच फंसकर गिर पड़े और उनकी जलकर मौत हो गई। बमुश्किल आग पर काबू पाने के बाद लोग वापस लौटे तो कामता प्रसाद का शव खेत में पड़ा मिला। सूचना पाकर परिवार के तमाम लोग रोते बिलखते मौके पर पहुंचे। मृतक का 25 वर्षीय पौत्र चंदू बाबा का जला हुआ शव देखकर बेहोश होकर गिर पड़ा। उसे बंडा के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। होश नहीं आने पर परिवार के लोग उसे इलाज के लिए शाहजहांपुर ले गए हैं। आग बुझाने के प्रयास में गांव बंडी निवासी प्रभूदयाल भी झुलस गए हैं। उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
सूचना पाकर एडीएम एफआर पीके श्रीवास्तव, एसडीएम लालबहादुर, सीओ उमेश शर्मा, एसओ रजी अहमद मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी की। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम को भेज दिया है। वृद्ध की मौत से घर में कोहराम मचा हुआ है।
मृतक आश्रित को नहीं मिलेगी आपदा राहत
घटनास्थल का दौरा करके लौटे एडीएम एफआर पीके श्रीवास्तव ने कहा कि मृतक कामता प्रसाद की उम्र लगभग 85 वर्ष होने और उनकी मृत्यु नरई जलाने के कारण होने से मृतक और उनके परिवार को कृषक दुर्घटना बीमा योजना अथवा आपदा राहत के अंतर्गत लाभान्वित करना संभव नहीं है।
नीम के पेड़ के कारण नहीं पहुंच सका दमकल वाहन
बंडा। गांव बंडी में खेतों में आग लग जाने की सूचना पाकर शाहजहांपुर से जिला अग्निशमन अधिकारी और पुवायां से दमकल टीम मौके के लिए रवाना हुई। गांव धर्मापुर में रास्ते के किनारे नीम के एक पेड़ का ठुंठ रास्ते के बीच होने के कारण दमकल वाहन मौके तक नहीं पहुंच सका। इस पर दमकल कर्मियों ने एक किसान की पावर स्प्रे मशीन से खेतों में छिड़काव कर आग पर काबू पाया। गांव के लोगों का कहना है कि वह लोग तमाम बार नीम के ठूंठ को कटवाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन पेड़ स्वामी कोई ध्यान नहीं देते हैं।
नरई जलाने से कई बार हो चुका है बड़ी क्षति
पुवायां। नरई जलाने से क्षेत्र में कई बार जान माल का भारी नुकसान हो चुका है, बावजूद इसके लोग नरई जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं।
कई वर्ष पूर्व खुटार क्षेत्र के गांव कुंइया और लालपुर में आग से भारी नुकसान हुआ था। तमाम घर जल गए थे और लोग दाने-दाने को मोहताज हो गए थे। इस दौरान कई मवेयाी भी जलकर मौत के मुंह में समा गए थे। इसके अलावा खुटार के गांव टाह खुर्द कलां, कैमहरिया आदि में भी नरई से लगी आग भारी तबाही मचा चुकी है।
पुवायां के गांव मीरपुर में भी वर्ष 2011 में आग से तमाम मवेशी जलकर मर गए थे और संपत्ति का भारी नुकसान हुआ था। पूर्व डीएम रितु माहेश्वरी ने नरई जलाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। उनके कार्यकाल में नरई जलाने पर तमाम किसानों को शातिभंग की आशंका के तहत जेल भी भेजा गया था।
एसडीएम लालबहादुर ने बताया कि नरई जलाने पर पहले से ही प्रतिबंध लगा हुआ है। बृहस्पतिवार को गांव बंडी में कामता प्रसाद की नरई जलाते मौत हो जाने की सूचना अधिकारियों को दी गई है। जो निर्देश मिलेंगे उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
नष्ट हो जाते हैं भूमि के पोषक तत्व
पुवायां। उप कृषि निदेशक डॉ. आरके यादव के अनुयार नरई जलाने से भूमि का उर्वरा शक्ति कम हो जाती है। भूमि के तमाम पोषक तत्व नष्ट होने के साथ ही मित्र कीट भी जलकर मर जाते हैं। नरई जलाने से अच्छा है कि नरई को खेत में ही जोत दिया जाए। थोड़ी सी यूरिया डाल देने से नरई जल्द ही खेत में गल जती है और खाद का काम करती है।
नरई जलाने से कभी भी हो सकता है भारी नुकसान
- तेज हवा भी बन सकती है नुकसान का सबब
पुवायां। गेहूं की कटाई के बाद शाम होते ही तमाम खेतों में नरई जलाने का काम शुरू कर दिया जाता है। इससे बंडा में हुए हादसे से भी बड़ा हादसा हो सकता है।
नरई जलाए जाने पर तेज हवा के कारण जरा सी चिंगारी थोड़ी ही देर में उग्र रूप धारण कर लेती है और हवा के कारण उठने वाली लपटों से आग पर काबू पाना मुश्किल हो जाता है। गत वर्ष कई स्थानों पर तेज हवा के दौरान नरई जलाए जाने से भारी नुकसान हुआ था।
नरई जलाने का कारण साठा धान है। क्षेत्र के बड़े और मझोले फार्मर गेहूं के तुरंत बाद साठा धान लगाते हैं। गेहूं को कंबाइन से कटाने के बाद यदि नरई नहीं जलाई जाए तो साठा लगाने में दिक्कत होती है। इस वजह से दूसरों के नुकसान की चिंता किए बगैर नरई जलाई जाती है और जरा सी लापरवाही तमाम लोगों का निवाला छीन लेती है। साथ ही जान पर भी बन आती है।
इन बातों का रखें ध्यान
0 जितनी भी जल्दी संभव हो गेहूं कटवा कर घर ले जाएं।
0 स्थानीय थाने और फायर स्टेशन का नंबर रखे। आग लगने पर तुरंत सूचना दें।
0 बीड़ी, सिगरेट अच्छी तरह बुझाकर ही फेंके।
0 घर में माचिस और ज्वलनशील पदार्थ बच्चों की पहुंच से दूर रखे।
0 खाना सुबह जल्दी और शाम को देर से बनाएं। तेज हवा चल रही हो तो चूल्हा बुझा दें।
0 नरई जलाने की बजाय खेत में ही जोत दें और यूरिया डाल कर सिंचाई कर दें। इससे आग का खतरा तो टलेगा ही खेत को खाद भी मिलेगी।
0 घूरे आदि में राख पूरी तरह से बुझाकर ही डालें।
0 गहाई कराते और कंबाइन से कटाई कराते समय पानी की व्यवस्था रखे।