फसली नुकसान से परेशान किसानों को खरीफ सीजन के लिए हाईब्रिड और सामान्य श्रेणी का धान बीज आसानी से सुलभ होगा और उन पर देय अनुदान की धनराशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी। इसके लिए नगर और ब्लॉक मुख्यालयों पर 16 से 25 मई तक विभिन्न बीज कंपनियां मेला लगाकर स्टालों के जरिए बीज उपलब्ध कराकर पूरा मूल्य लेंगी। अनुदान का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा जिन्होंने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया है।
किसानों को शासन स्तर से बीज पर अनुदान पहले भी मिलता रहा है, लेकिन किसानों की यह आम शिकायत रही है कि विक्रेता अनुदान के संबंध में कोई अधिकारिक आदेश नहीं मिलने का हवाला देकर पूरी कीमत वसूलते हैं। अनुदान श्रेणी का बीज केवल चहेते किसानों तक पहुंचाने का आरोप भी विक्रेताओं पर लगता रहता है। दूसरी ओर बीज कंपनियों के स्टॉकिस्ट और डीलर सरकारी तंत्र पर अनुदान में हिस्सेदारी मांगने की तोहमत लगाते थे।
ऐसे में किसानों की स्थिति चक्की के दो पाटों के बीच पिसने जैसी बन जाती थी। इन्हीं शिकायतों की रोकथाम के लिए शासन ने किसानों को बीज पर छूट का लाभ देने के लिए पारदर्शी किसान योजना लागू की है। योजना का लाभ पाने के लिए किसानों को जरूरी प्रपत्र कृषि विभाग को देकर अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा। रजिस्ट्रेशन कराने के बाद संबंधित किसान योजना की पात्रता सूची में शामिल किए जाएंगे।
इस तरह कराना होगा रजिस्ट्रेशन
किसान खतौनी नंबर, आईडी और बैंक खाता नंबर कृषि विभाग को उपलब्ध कराएंगे। जिला मुख्यालय से काफी फासले पर दूरदराज के गांवों में रहने वाले किसान तहसील और ब्लॉक मुख्यालयों के लोकवाणी केंद्रों, जनसेवा केंद्रों और निजी साइबर कैफों पर कृषि विभाग की वेबसाइट पर जाकर अपना ऑनलाइन पंजीकरण करा सकेंगे।
ब्लॉक मुख्यालयों पर सुलभ होगा बीज
योजना के तहत धान की हाईब्रीड वैरायटीज में शामिल 6444, एराइज प्राइमा, एराइज गोल्ड और 6129 प्रजातियों के धान बीज उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न बीज कंपनियां 16 से 25 मई तक ब्लॉक मुख्यालयों पर किसान मेले लगाएंगी। इन मेलों में कंपनियां अपने स्टाल लगाकर बीज की पूरे मूल्य पर बिक्री करेंगी।
इस प्रक्रिया के तहत मिलेगा अनुदान लाभ
स्टालों पर हाईब्रीड अथवा सामान्य श्रेणी का धान बीज खरीदने वाले किसानों को जारी की गईं खरीद की रसीदों के आधार पर वहीं मौजूद कृषि विभाग के कर्मचारी पंजीकरण के आधार पर उनके बैंक खातों में 130 रुपये प्रति किलो की दर से अनुदान धनराशि भिजवाने की व्यवस्था करेंगे। दो हेक्टेयर रकबा के समतुल्य अधिकतम 30 किलो बीज पर अनुदान दिया जाएगा।
पहले आएं, पहले पाएं
ब्लॉक मुख्यालयों पर लगने वाले कंपनियों के स्टालों पर बीज की डिमांड बढ़ने पर उसकी उपलब्धता कम पड़ सकती है। जिला कृषि अधिकारी अखिलानंद पांडेय के अनुसार इसे देखते हुए योजना को पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर लागू किया गया है। उन्होंने बताया कि जिले के छह हजार किसान योजना के तहत पंजीकृत हो चुके हैं। जितनी जल्दी किसान पंजीकरण कराएंगे, उन्हें योजना का लाभ मिलने की संभावना बढ़ेगी।