शाहजहांपुर। निजी अस्पतालों में ऑपरेशन के बाद मरीजों की हालत बिगड़ने से मौत के कई मामले सामने आने पर सीएमओ ने सख्त रुख अपनाया है। ऐसे अस्पतालों को नोटिस जारी कर सर्जन का शपथपत्र उपलब्ध करवाने का निर्देश दिए गए हैं। जवाब न मिलने पर संचालकों पर कार्रवाई भी होगी।
जिले में करीब 100 निजी अस्पताल पंजीकृत हैं। नियम के अनुसार, अस्पताल के संचालन के लिए सर्जन का प्रमाणपत्र होना अनिवार्य है। ऐसे में कुछ संचालकों ने खेल कर दूसरे प्रदेश के सर्जन का प्रमाणपत्र लगाकर पंजीकरण करा लिया। सर्जन का नाम भी अस्पताल में अंकित कर दिया, लेकिन वह ऑपरेशन करने नहीं आते हैं। मरीज के आने पर अप्रशिक्षित स्टाफ से ऑपरेशन करवाकर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ किया जाता है।
अल्हागंज के एक अस्पताल में ऐसी ही घटना सामने आने के बाद सीएमओ ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने बताया कि सर्जन का प्रमाणपत्र लगाने वाले प्रत्येक अस्पताल संचालक से सर्जन का शपथपत्र मांगा जाएगा, जिसमें उल्लेख करना होगा कि संबंधित सर्जन ही अस्पताल में मरीजों के ऑपरेशन कर रहे हैं। सत्यता जानने के लिए आकस्मिक जांच भी होगी।
दूसरी जगह से बुलाते हैं डॉक्टर
-ऑपरेशन के नाम पर अस्पताल संचालक मोटी रकम वसूलते हैं। ऐसे में अस्पताल संचालकों ने सर्जन व तकनीशियन से समन्वय स्थापित कर रखा है। पड़ोसी जिले या सरकारी अस्पतालों से भी डॉक्टरों को बुलाया जाता है। आपातकाल में डॉक्टरों को बुलाने पर अतिरिक्त शुल्क मरीजों के तीमारदारों से वसूला जाता है।
संबंधित अस्पतालों को नोटिस जारी कर शपथपत्र मांगा जाएगा। बाहर के लोग आकर ऑपरेशन कर जिले का नाम बदनाम कर रहे हैं। पंजीकृत सर्जन ही ऑपरेशन कर सकता है। जांच के लिए टीम भी बनाई गई है।
आरके गौतम, सीएमओ