केंद्र सरकार की नोटबंदी के बाद से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा नई करेंसी देने में की जा रही कंजूसी से न सिर्फ बाजारों बल्कि बैंक शाखाओं में छोटे नोटों का संकट बढ़ता जा रहा है। सौ रुपये के नोट व्यापारियों द्वारा रोकने और दो हजार के नए नोटों की करेंसी खत्म हो जाने के बाद अधिकांश बैंकों में वेतन सप्ताह के तीसरे दिन शनिवार को अधिकांश कर्मचारियों को दस और 50 रुपये के नोटों से सीमित भुगतान करना पड़ा। बैंकों से निराश लौटे लोग नगदी पाने के लिए चालू हालत वाले एटीएम के आगे घंटों कतार लगाए खड़े रहे।
वेतन सप्ताह के मद्देनजर आरबीआई से यहां भेजी गई करेंसी कर्मचारियों को वेतन और पेंशन मद में शुक्रवार शाम तक बांट दी गई। शनिवार को तीसरे दिन भुगतान शुरू होने पर एसबीआई मेन ब्रांच समेत बॉब की गोविंदगंज मुख्य शाखा समेत तमाम बैंक शाखाओं में दो घंटे बाद ही सौ रुपये के नोटों की कमी हो गई। नतीजे मेें कैश काउंटर पर खड़े अन्य कर्मचारियों और पेंशनरों को बाद में दस और 50 रुपये के नोटों की गड्डियों से भुगतान किया गया। यही नहीं, अधिकतम लोगों को धनराशि सुलभ कराने के लिए शनिवार को अनेक बैंक शाखाओं के भुगतान बाउचर पर दर्ज धनराशि में कटौती करनी पड़ी। शहरी क्षेत्र में स्थित एसबीआई के एक शाखा प्रबंधक के अनुसार दो हजार का नया नोट बैंकों से निकल चुका है और पांच सौ के नए नोट के करेंसी अभी तक प्राप्त नहीं हुई। यही नहीं, सौ रुपये के नोट मार्केट में डंप हो रहे हैं। इन हालातों मेें एक-दो दिन के अंदर नई करेंसी नहीं मिलने की दशा में भुगतान की स्थिति बिगड़ जाएगी। नोटों की लगातार कमी के बारे में अग्रणी बैंक प्रबंधक का कहना है कि आरबीआई से जो भी करेंसी प्राप्त हो रही है, उसे अधिकतम खातेदारों तक पहुंचाने के लिए छोटे भुगतान को प्राथमिकता दी जा रही है। एलबीएम के अनुसार बैंकों में जमा हो रही नगदी भुगतान के कैश काउंटरों पर डायवर्ट की जा रही है। उधर, एसबीआई की चौक घंटाघर शाखा पर एक खातेदार ने सौ के नोटों वाले तीन लाख रुपये जमा कराकर स्टाफ को राहत पहुंचाई। शाखा प्रबंधक अपूर्व गुप्ता ने जमा कराई गई इसी धनराशि से तमाम खातेदारों को पेमेंट कराया।