शाहजहांपुर। चित्रा टॉकीज में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथाव्यास डाॅ. आचार्य दामोदर दीक्षित ने मनु महाराज के वंश वर्णन और राजा अंबरीश की कथा सुनाई। कथा व्यास ने कहा कि निरपराध भक्त को कोई दंड नहीं दे सकता।
कथा व्यास ने कहा कि राजा अंबरीश ने भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए पत्नी सहित एकादशी व्रत का नियम लिया था। जब वह व्रत का पारण करने लगे तभी महर्षि दुर्वासा वहां आ गए। राजा की भोजन की प्रार्थना स्वीकार कर वे यमुना तट पर स्नान करने चले गए। व्रत भंग होने का विचार कर राजा ने भगवान के चरणामृत से पारण कर लिया।
जब महर्षि दुर्वासा को पता चला कि राजा ने उन्हें भोजन कराए बिना ही व्रत का पारण कर लिया तो वे नाराज हो गए। उन्होंने सिर के बाल से कृत्या नाम की राक्षसी पैदा कर दी जो राजा अंबरीश को मारने दौड़ी। तभी भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से राक्षसी का वध कर दिया। इसके बाद महर्षि दुर्वासा ने राजा अंबरीश के पास जाकर क्षमायाचना की।
भगवान ने सिद्ध किया कि निरपराध भक्त को कोई दंड नहीं दे सकता। मुख्य यजमान कमलेश कुमार खन्ना ने कथाव्यास एवं अन्य विद्वानों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। इस अवसर पर ध्रुवनारायन मेहरा, सुधा मेहरा, सोमनाथ कपूर, सरिता कपूर, जयप्रकाश खन्ना, चंद्र शेखर खन्ना उर्फ धीरू, रोली खन्ना, रागिनी खन्ना आदि मौजूद रहे।