पुत्तूलाल, गांव रामपुर कलां खुटार
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पुवायां। विधायक और सांसद बनने के लिए चुनाव मैदान में उतरकर जीत हासिल करना जरूरी है। इसके अलावा पार्टियां भी अपनी ओर से विधान परिषद में भेज देती हैं, लेकिन आज हम आपका परिचय ऐसे लोगों से कराएंगे जो बिना कोई चुनाव लड़े और बिना किसी पार्टी का सहारा लिए ही विधायक कहे जाते हैं। हालांकि उन्हें यह नाम उनके गांव और आसपास के लोगों ने दिए हैं। विधायक नाम वाले तमाम लोग विधानसभा तक नहीं पहुंच पाए हैं।
पुवायां क्षेत्र के गांव बहादुरापुर में सत्यपाल चौहान हैं। आठवीं तक शिक्षा प्राप्त सत्यपाल खेती का काम करते हैं। वह कभी ग्राम पंचायत तक का चुनाव नहीं लड़े हैं, लेकिन पूरा गांव उन्हें नाम से कम विधायक के नाम से ज्यादा जानता है। इसी प्रकार गांव महमूदपुर सैंजनियां में छविनाथ रहते हैं। बच्चों को पढ़ा कर परिवार की गुजर करते हैं। काफी समय पहले एक बार विधानसभा चुनाव में खड़े हो गए। भले ही गांव के भी लोगों ने उन्हें वोट न दिए हों और विधानसभा नहीं भेज पाए, लेकिन पूरा गांव उन्हें विधायक कहकर बुलाता है।
खुटार के गांव माधौपुर के बदल्ले मेहनत मजदूरी करते हैं। उपचुनाव में विधानसभा का चुनाव लड़े थे। जमानत तक जब्त हो गई, लेकिन उन्हें लोग विधायक कह कर बुलाने लगे। अभी भी लोग उनको विधायक ही कह कर बुलाते हैं। विधानसभा चुनाव लड़ रहे 11 प्रत्याशियों में जीत एक को ही नसीब होगी, लेकिन सभी प्रत्याशियों के समर्थक उनको विधायक जी ही कह कर बुलाने लगे हैं।
खुटार के ही गांव रामपुर कलां के पुत्तूलाल ने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा। वह राज मिस्त्री और खेती का काम करते हैं, लेकिन राजनीतिक सक्रियता के चलते गांव के लोग उनको विधायक कह कर बुलाते हैं। गांव भूरखेड़ा में चेतराम रहते हैं। पुवायां के चेतराम विधायक के नाम के होने के कारण गांव में लोग उनको भी विधायक कह कर बुलाते हैं।
सत्यपाल, गांव बहादुरापुर पुवायां- फोटो : POWAYAN