nda one time efforts, now sucseesful
पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री और एनडीए एक के दौरान केंद्र में असम के प्रभारी मंत्री रहे स्वामी चिन्मयानंद का कहना है कि असम में भाजपा की सफलता एनडीए एक के कार्यकाल के दौरान वहां बोए गए बीज का सुखद परिणाम है। तब पहली बार केंद्र की ओर से बोडो वाले चार जिलों को स्वायत्तता दी गई थी। बोडो न तो हिंदू हैं, ना ही मुस्लिम या ईसाई लेकिन वे अपने ही प्रदेश में उपेक्षित थे। इसी कारण उनकी समुचित तरक्की को स्वायत्तता देने के साथ ही पैकेज भी दिया गया। तभी से गैर कांग्रेसी सामाजिक और राजनीति शक्तियां भाजपा के करीब आनी शुरू हुईं। वह अब फलीभूत भी हुईं। बोडो और असम गण परिषद भाजपा के साथ रहे तो बड़े स्तर पर कांग्रेस का जनाधार खिसका। गठबंधन की अगुवाई करते हुए भाजपा से जीते सर्वानंद सोनेवाल भी बोडो मूल से ही जुड़े हैं।
उन्होंने दावा किया कि असम में भाजपा की इतनी बड़ी सफलता में वहां के स्थानीय मुसलमान मतदाताओं का भी साथ रहा। वहां घुसपैठ पश्चिम बंगाल से भी ज्यादा बड़ी समस्या है। बांग्लादेश से आने वाले मुसलमानों के चलते असम के स्थानीय मुसलमानों की आमदनी बुरी तरह प्रभावित होती है। स्थानीय मुसलमान बांग्लादेश से घुसपैठ करने वालों के विरोध में रहते हैं और लेकिन कांग्रेस ने अपने चुनावी लाभ के लिए लगातार बांग्लादेशी घुसपैठियों का ही साथ दिया। यहां तक कि एक घुसपैठिये को वहां की कांग्रेस सरकार ने राज्य मंत्री तक बना दिया था। प्रकरण संज्ञान में आते ही तत्काल वहां के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई को टोका था तो उन्होंने तत्काल उसे मंत्री पद से हटाया। एआईडीयूएफ भी 18 से सिमट कर 14 पर रह गई और उसके नेता बदरूद्दीन खुद अपनी सीट गवां बैठे। उन्होेंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत में भाजपा की इस मजबूती से वहां भी केंद्रीय मदद से होने वाले विकास कार्यों में तेजी आएगी।