एनसीसी के संयुक्त सीएटीसी और टीएससी (प्री) प्रशिक्षण शिविर में शुक्रवार को महिला कैडेट्स को टेंट पिचिंग और ड्रिल का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद कैडेट्स ने फायरिंग का भी प्रशिक्षण लिया। कैंप कमांडेंट कर्नल शौकत अली खां ने ड्रिल प्रशिक्षण से पूर्व कैडेट्स को संबोधित करते हुए कहा कि जर्मन के जनरल ड्रॉल ने वर्ष 1700 में ड्रिल का आविष्कार किया था। उसके बाद ड्रिल फौज की रीढ़ बन गई। इसके माध्यम से अनुशासन के साथ सैल्यूट, दाएं-बाएं मुड़ने, चलने आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद हवलदार लायकराम ने ड्रिल का प्रशिक्षण दिया।
इसी क्रम में उन्होंने रायफल से शिस्त लेना सिखाया। शूटिंग के लिए पोेजीशन लेने, लाइनिंग पोजीशन, टारगेट, ट्रिगर, ऑपरेशन के बारे में विस्तार से जानकारी देकर फायरिंग का अभ्यास कराया।
मेजर एनयू खान ने महिला कैडेट्स में जोश भरते हुए कहा कि एक गोली-एक दुश्मन का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है, जब सैनिक सही पोजीशन के साथ दुश्मन पर आक्रमण कर रहा हो।
दूसरे टीएससी कैंप में डिप्टी कैंप कमांडेंट कर्नल एसके शेरावत ने प्रशिक्षणार्थियों को ओटी एरिया में टेंट पिचिंग का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि फौज में दुर्गम क्षेत्रों में सैनिकों को ऑपरेशन करने पड़ते हैं, इसके लिए टेंट पिचिंग जरूरी होता है, जो कम समय में तैयार करने पड़ते हैं। इसी कड़ी में लेफ्टिनेंट कर्नल एचसी पांडेय ने हथियारों का रख-रखाव करना सिखाया। प्रशिक्षण में कर्नल एसके यादव, कर्नल बलराज सरदाना, सूबेदार भरत सिंह, सूबेदार मेवा सिंह, सूबेदार गुरमेल सिंह आदि का योगदान रहा।