शाहजहांपुर। मरीज को रक्त देने के लिए जब अपने कदम पीछे खींच लेते हैं, उस समय नरेंद्र मिड्ढा जरूरतमंदों के लिए आगे आकर उनका बहुमूल्य जीवन बचाते हैं। उनका रक्त जिले के कई लोगों के शरीर में दौड़ रहा है। दो दोस्तों के साथ रक्तदान करने की मुहिम 27 साल बाद भी जारी है। लोगों की मदद करने को उन्होंने रक्तदाताओं की लंबी सूची तैयार की है। वह खुद कितनी बार रक्तदान कर चुके हैं, यह उन्हें ठीक से याद नहीं। हालांकि वह लगभग 80-90 बार रक्तदान का दावा करते हैं।
शहर की कृष्णानगर कॉलोनी निवासी कपड़ा व्यापारी नरेंद्र मिड्ढा सेवा कार्यों से बचपन से जुड़े रहे। वर्ष 1995 में भारत विकास परिषद से समाज की सेवा के लिए जुड़ गए थे। सामाजिक क्लबों से हटकर स्कूलों में स्वास्थ्य शिविर, चित्रकला प्रतियोगिता आदि कराने में पूरा सहयोग किया। इतना सब करने के बाद भी मन को संतुष्टि नहीं मिली। मिड्ढा बताते हैं कि उस समय खून की काफी किल्लत रहती थी।
जिला अस्पताल की ब्लड बैंक से हर व्यक्ति को आसानी से खून नहीं मिल पाता था। मिड्ढा ने अपने मित्र रोहित गुप्ता व मनीष गुप्ता से मंत्रणा के बाद रक्तदान की मुहिम को चलाने की ठानी। अगले ही दिन वह जिला अस्पताल पहुंचे और अपना नंबर उपलब्ध कराकर जरूरतमंदों के लिए मुहैया कराने का वादा किया। अस्पताल से उनके पास मांग आने लगी। वह खुद तो रक्तदान करते थे, साथ ही दूसरों लोगों को ले जाकर रक्तदान कराते थे। उनकी यह मुहिम अब भी चल रही है, जिससे दूसरों की जिंदगी को बचाया जा सके।
मिड्ढा ने डोनरों की चेन तैयार की
27 वर्ष के सफर में मिड्ढा ने रक्तदान करने वालों की एक चेन तैयार कर ली है। रक्तदान करने वाले करीब 500 लोग उनके संपर्क में रहते हैं। डिमांड आने के बाद संबंधित ब्लड ग्रुप की जानकारी कर संबंधित डोनर को भेजकर मरीज की जान बचाने का काम मिड्ढा करते हैं।
रक्तदान के लिए दूसरों को करते हैं जागरूक
जरूरतमंद को खून देने के साथ ही वह लोगों को रक्तदान के प्रति जागरूक भी करते हैं। नरेंद्र बताते हैं कि वह जिसे खून देते हैं, उसके करीबियों को रक्तदान के लिए व्याप्त भ्रांतियों को दूर करते हैं। समझाते हैं कि हमारे खून से आपके मरीज की जान बचीं। आप भी खून देकर किसी की जिंदगी को बचाएं। उनसे प्रेरित करने से तमाम लोग उनके साथ जुड़ चुके हैं।
रात में दो बजे डोनर ढूंढकर दिलाया था रक्त
एक बार उनके फोन पर दिसंबर की कड़ाके की सर्दी में मित्र का फोन आया था। उन्होंने एक हादसे की जानकारी देकर रक्त का इंतजाम की गुजारिश की। भीषण सर्दी में एक बार उन्होंने जाने से मना कर दिया। दस मिनट के बाद दोबारा फिर कॉल आई। उनके मित्र ने बताया कि हादसे में युवक की जान चली गई। दूसरे की हालत भी काफी नाजुक हैं। नरेंद्र ने एक सप्ताह पहले ही रक्तदान किया था। तब उन्होंने रात में एक डोनर का तलाशा और मरीज के लिए रक्तदान कराया था।
रक्तदान को लेकर काफी भ्रांतियां हैं। हम रक्तदान करने के साथ ही उन भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास करते हैं। अभी तक सैकड़ों लोगों को खून दे चुके हैं। उनके तीमारदारों को खून देने के लिए जागरूक भी करते हैं। -नरेंद्र मिड्ढा