शाहजहांपुर। ऊसर भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए प्रयुक्त की जाने वाली जिप्सम उर्वरक की वन विभाग की ओर से की गई खरीद में लाखों का गोलमाल सामने आया है। दरअसल, खाद के सीलबंद बोरों पर वजन तो 50 किलो लिखा था, पर उनमें मात्र 10 से 15 किलो खाद भरी हुई थी। शिकायत के बाद डीएफओ सचिन कुमार ने मामले का संज्ञान लेते हुए उप खंड अधिकारी के नेतृत्व में विभागीय जांच कमेटी गठित कर दी है।
तिलहर, सिंधौली, जलालाबाद, सदर और खुटार वन रेंज में ऊसर भूमि की बहुतायत है। वहां की जमीन को उपजाऊ बनाकर उसकी उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए जिप्सम की खरीद की गई थी। बंजर हो चुकी भूमि पर फसल लेने अथवा पौधे लगाने से कुछ दिन पहले यह खाद खाली भूमि में डाल दी जाती है। इसके बाद पौधरोपण किया जाता है।
प्रत्येक रेंज में लगभग 1000 बोरी खाद की खरीद की गई। प्रति बोरी कीमत लगभग 600 रुपये है। इस तरह लगभग 30 लाख रुपये से जिप्सम की पांच हजार बोरियां खरीद की गईं। टेंडर लेने और खाद की आपूर्ति करने वाली फर्म को विभाग से भुगतान भी हो गया। बाद में इस्तेमाल के लिए खाद की बोरियां वन रेंज में भेजे जाते वक्त उनका वजन कम प्रतीत हुआ।
बाद में एक विभागीय कर्मचारी की शिकायत पर सीलबंद बोरियों की तौल कराई गई तो पता चला कि प्रति बोरी बमुश्किल 10 से 15 किलो खाद भरी गई है। घोटाले का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए डीएफओ ने विभाग के एसडीओ डॉ. सुशील कुमार की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित कर दी है। साथ ही जांच कमेटी को एक सप्ताह में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
जांच में इस बिंदु को भी शामिल किया जाएगा कि खाद के बोरों का भौतिक सत्यापन कराए बगैर आपूर्ति करने वाली फर्म को भुगतान की संस्तुति विभाग के किस अधिकारी के स्तर से की गई।
000
पौधरोपण के बाद आई जिप्सम की याद, जवाब तलब
नियमानुसार ऊसर-बंजर भूमि में किसी फसल की बोआई अथवा पौधरोपण से पहले खेतों-गड्ढों में जिप्सम उर्वरक डाला जाना चाहिए। इसके विपरीत पांचों रेंज के वन क्षेत्राधिकारियों को पौधरोपण होने के करीब दो से तीन सप्ताह बाद इसका प्रयोग किए जाने की सुध आई। यही वजह है कि पौधरोपण का लक्ष्य पूरा होने के बावजूद जिप्सम की सैकड़ों बोरियां विभागीय नर्सरियों में रखी हैं। पौधरोपण के दौरान उनका प्रयोग ही नहीं किया गया। इस लापरवाही पर भी डीएफओ ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी वन क्षेत्राधिकारियों का जवाब तलब किया है।
-
एसडीओ डॉ. सुशील कुमार की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित कर दी गई है। कमेटी से एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। इस बारे में संबंधित फर्म से भी पूछताछ की जाएगी। जिस स्तर से भी यह धांधली हुई, उसे किसी भी दशा में बख्शा नहीं जाएगा और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पौधरोपण में जिप्सम का प्रयोग नहीं करने वाले वन क्षेत्राधिकारियों से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।
-सचिन कुमार, डीएफओ, शाहजहांपुर