शाहजहांपुर। मुमुक्षु महोत्सव में चल रही रामकथा के पांचवें दिन कथाव्यास विजय कौशल महाराज ने भगवान राम के जन्म का प्रसंग सुनाया। श्री राम जय राम जय जय राम... भजन की संगीतमय प्रस्तुति से श्रोता भावविभोर होकर झूमने लगे। प्रभु का जन्म होते ही पूरी अवधपुरी में बधाइयां बजने लगीं और उल्लास का माहौल छा गया।
कथाव्यास ने कहा कि जब भगवान शिव ने प्रभु श्री राम के दर्शन किए तो प्रभु हंस पड़े और शिवजी रोने लगे। माता-पिता और गुरु के चरणों से ही आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। मां का स्थान सर्वोपरि है, क्योंकि प्रसव पीड़ा जैसी कोई पीड़ा नहीं होती है।
कथाव्यास ने सुनाया कि जब रावण का पुत्र मेघनाद पिता की आज्ञा से पूरे ब्रह्मांड में धर्म के विनाश की लीला करने लगा तो सभी देवता त्राहिमाम करते हुए ब्रह्मा जी के पास गए। ब्रह्मा जी के कहने पर उन्होंने भगवान को प्रेमपूर्वक पुकारा। उनकी पुकार सुनकर भगवान बोले कि धैर्य रखिए एवं प्रतीक्षा करिए, जल्द ही हम अवधपुरी में अवतरित होकर धरती के सभी असुरों का विनाश करेंगे।
कथा का समापन आरती के साथ हुआ। आरती में रामचंद्र सिंघल, उमा सिंघल, डॉ हरीश रौतेला, रवि मिश्रा एडवोकेट, डॉ सत्य प्रकाश मिश्रा, वेद प्रकाश गुप्ता, सुरेंद्र सेठ, सचिन बाथम, संतोष मिश्रा एवं प्रेमा मिश्रा, अशोक अग्रवाल एवं निर्मला अग्रवाल, एसएस कॉलेज के प्राचार्य प्रो. आरके आजाद एवं रश्मि आजाद उपस्थित रहे। प्रसाद वितरण में संजीव बंसल एवं कल्पना बंसल का योगदान रहा। कथा के दौरान रोहित सिंह, डॉ. रमेश चंद्रा, डॉ. शालीन सिंह, डॉ. आलोक मिश्रा, रामलखन सिंह, श्रीप्रकाश डबराल, डाॅ. रामनिवास गुप्ता, चंद्रभान त्रिपाठी आदि का सहयोग रहा।
मुमुक्षु आश्रम में रामकथा का श्रवण करते श्रद्धालु। स्रोत: आयोजक