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अब्बू से बोला सानी, दुआ करिए ट्रेन मिल जाएं तो सफर आसान हो जाए

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तिलहर की अलाइना अंसारी ने यूक्रेन से अपनी क्लासमेट के साथ फोटो शेयर की, बीच में अलाइना अंसारी मौज? - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। खारकीव में मिसाइलों और बम के धमाकों के बीच मोहम्मद सानी ने अपने हॉस्टल को छोड़कर वतन वापसी के लिए कदम बढ़ा दिए हैं। लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए मोहम्मद सानी सुबह अपने दोस्तों के साथ रेलवे स्टेशन पर पहुंच गया। हालांकि, दोपहर तक उसे ट्रेन नहीं मिल पाई। ट्रेन के जरिये कीव तक पहुंचेगा। उसके बाद आगे का सफर तय करेगा।
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शहर के मोहल्ला महमंद जंगला निवासी मोहम्मद आसिफ का बेटा सानी खारकीव में फंस गया था। भीषण हालात के चलते उसके हॉस्टल से निकलने का मौका नहीं मिल रहा था। इसके बाद से पूरा परिवार चिंता में था। बम धमाकों की आवाजें से सहमे मोहम्मद सानी ने मंगलवार रात 12 बजे अपने पिता को फोन कर हर हाल में बुधवार को हॉस्टल से निकलने की बात कही थी। सुबह छह बजे कुछ देर के लिए युद्ध विराम होने पर मोहम्मद सानी अपने दोस्त के साथ हॉस्टल के बंकर से निकलकर खारकीव के रेलवे स्टेशन पर पहुंच गया।
दोपहर पौने तीन बजे तक कोई ट्रेन नहीं आई थी। इसके चलते वहां काफी ज्यादा भीड़ थी। उसने पिता को फोन कर बताया कि वह स्टेशन पर पहुंच गया। बस दुआ कीजिए, ट्रेन मिल जाएं तो आगे का सफर आसान हो जाए। आसिफ ने बताया कि खारकीव के हालात काफी खराब हो गए हैं। बेटे के मोबाइल में बैट्री भी खत्म होने को थी। इसलिए, उसने खुद ही मेसेज या फोन करने की बात कही है। अब पूरा परिवार सानी की सकुशल वापसी के लिए दुआ कर रहा है।
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एयरपोर्ट की ओर रवाना हुई तीन बेटियां
शाहजहांपुर। यूक्रेन के विनिस्तिया में एमबीबीएस कर रहीं इंतेसाम उर्फ जिया, सदफ और एंजिला की वतन वापसी की राह आसान हो गई है। तीनों एयरपोर्ट जाने के लिए शाम को बस में सवार हो गईं। माना जा रहा है कि बृहस्पतिवार को तीनों भारत आ जाएंगी। परिवार वाले भी उनके फ्लाइट में बैठने का इंतजार कर रहे हैं।
खलीलगर्वी निवासी डॉ.अब्दुल मजीद की बेटी इंतेसाम उर्फ जिया, रंगीन चौपाल निवासी सलीमुद्दीन की बेटी सदफ और मोहम्मद जई निवासी रहबर की बिटिया एंजिला सोमवार को यूक्रेन को बॉर्डर को पार कर रोमानिया पहुंच गईं थीं। दो दिन ठहरने के बाद बुधवार को तीनों बस के जरिये एयरपोर्ट के लिए रवाना हो गईं। इंतेसाम उर्फ जिया ने डॉ. मजीद को यह मेसेज भेजा है। डॉ. मजीद ने बताया कि बेटियों के हवाई जहाज में बैठने के बाद चिंता खत्म हो जाएगी। उसके बाद ही बेटियों के लेने के लिए रवाना होंगे।
हर्ष ने बॉर्डर पार किया, सकलैन बुडापेस्ट पहुंचा
-पशुपालन विभाग के वरिष्ठ लिपिक जियाउद्दीन अंसारी का बेटा सकलैन जिया अंसारी बुधवार को हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट पहुंच गया। उसने वहां से अपने पिता से फोटो भी साझा किया। जियाउद्दीन ने बताया कि बेटे ने हंगरी में सारी कागजी कार्रवाई को पूरा कर लिया है। जल्द ही वापसी हो जाएगी। उन्होंने बताया कि दिल्ली या लखनऊ जहां भी बेटा आएगा। वहां के लिए परिजन के साथ रवाना होंगे।
वहीं दूसरी तरफ आनंदपुरम कालोनी निवासी गिरीश अवस्थी का बेटा हर्ष अवस्थी भी यूक्रेन से बाहर आ गया है। बुधवार शाम पांच बजे हर्ष ने फोन कर बताया कि हंगरी बॉर्डर को पार कर लिया। इंटरनेट नहीं चलने की वजह से बात नहीं हो पाएगी।
फोटो नंबर 21
बीमार होने के चलते दो दिन देर से देश लौटेगी इफरा
-बिजलीपुरा निवासी दिलशाद और पूर्व सभासद नूर फातिमा की बेटी इफरा खान थकान के चलते बीमार होने के चलते दो दिन देरी से स्वदेश लौटेगी। पूरा परिवार उसका बेसब्री से इंतजार कर रहा है। बुधवार को इफरा रोमानिया एयरपोर्ट से एक किलोमीटर दूर होटल में ठहरी हुई है। दिलशाद ने बताया कि यूक्रेन से रोमानिया आते समय 15 किमी तक बेटी को पैदल चलना पड़ा था।
उसके बाद बॉर्डर को पार करने के लिए जांच के लिए 10 से 12 घंटे तक लाइन में खड़ा रहना पड़ा था। लगातार चलने की वजह से बेटी के पैर सूज गए थे। सर्दी और बर्फ बारी के चलते 28 फरवरी को लाइन में लगने के दौरान इफरा बीमार होकर गिर पड़ी थी। इसके बाद उसके साथियों ने उसे कुछ घंटे आराम कराया। फिर हिम्मत कर इफरा लाइन में लगी और रोमानिया बार्डर में प्रवेश किया। दिलशाद की मानें तो बृहस्पतिवार को इफरा का नंबर आने की संभावना है। शुक्रवार को वह भारत आ सकती है।
मम्मी-पापा से मिलकर खुश हुई अंशिका, रिश्तेदार मिलने पहुंचे
शाहजहांपुर। स्वामी धर्मानंद इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. अमीर सिंह यादव व शिक्षिका वंदना यादव की बेटी अंशिका यादव यूक्रेन से लौट आईं। मंगलवार रात हवाई जहाज के जरिये दिल्ली पहुंचीं। अंशिका अपने मम्मी-पापा से मिलकर खुश हो गईं। बुधवार को तमाम रिश्तेदार बेटी से मिलने के लिए पहुंचे। बृज बिहार कॉलोनी निवासी अंशिका यादव विनिस्तियां में एमबीबीएस कर रही थी। हालात खराब होने पर 26 फरवरी को उसकी वापसी के लिए टिकट बुक था। लेकिन, तनाव बढ़ने के कारण फ्लाइट निरस्त होने के कारण वापसी नहीं हो सकी।
अंशिका यादव ने बताया कि वहां का माहौल काफी ज्यादा खराब था। बम गिरने के दौरान एक बिल्डिंग गिर गई थी। उसने बताया कि लगातार माहौल खराब होने पर 26 को बस के जरिये रोमानिया के लिए निकल गए थे। बस ने रोमानिया बॉर्डर के चेरेविनिस्ती से छह किलोमीटर दूर उतार दिया। वहां से पैदल ही रास्ता तय किया। सर्दी के कारण चल नहीं पा रही थीं। फिर भी हिम्मत कर एक-एक कदम आगे बढ़ाया। बॉर्डर पर पहुंचने पर 28 फरवरी को काफी ज्यादा भीड़ हो गई थी। धक्का-मुक्की के बीच वह किसी तरह अंदर प्रवेश कर गईं थीं। इस बीच सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को रोकने के लिए हवा में फायरिंग की। बॉर्डर पार करने के बाद प्राइमरी स्कूल में रोका गया। एक मार्च को हवाई जहाज से यहां आने का मौका मिला।
घर पहुंची जया से मिलने आ रहे रिश्तेदार
तिलहर के मोहल्ला बहिदुल्लागंज निवासी डॉ. चूड़ामणि और राधारानी की बिटिया जया मंगलवार देर रात घर पहुंची। बुधवार को उसके घर पर रिश्तेदारों और शुभचिंतकों के आने का सिलसिला जारी रहा। सभी उसका हाल-चाल लेने के साथ हौसले की सराहना करते हुए नजर आए। जया ने बताया कि घर आने के बाद बहुत ज्यादा सुकन मिला। वहां रोते थे, लेकिन आंसू नहीं निकलते थे। इतनी ज्यादा सर्दी हो रही थी। बच्चे खड़े-खड़े गिर जाते थे। उन्होंने बताया कि हवाई जहाज से उतरने के बाद मुंबई में काफी अच्छा लगा। ऐसा लगा कि अपने घर वापस आ गए। रोमानिया में काफी ज्यादा सुविधाएं मिली। इसके लिए प्रधानमंत्री जी का आभार व्यक्त करते हैं।
पुलकित पहुंचा हंगरी, परिजन ने राहत की सांस ली
जलालाबाद। यूक्रेन में फंसे बेटे के हंगरी पहुंचने की सूचना मिलने के बाद परिजन को काफी राहत मिली है। अब एक दो दिन में उसके देश पहुंचने की उम्मीद है। बेटे के युद्धग्रस्त इलाके से बाहर निकल आने पर परिजन भगवान और सरकार का शुक्रिया अदा करते नहीं थक रहे।
नगर के मोहल्ला नौसारा निवासी राकेश व सीमा भारद्वाज का इकलौता बेटा पुलकित भारद्वाज यूक्रेन की कीवी यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहा है। हमले के बाद से पुलकित के घरवाले बेटे की कुशलता को लेकर काफी परेशान थे। तीन दिन पहले बेटे ने फोन कर बताया था कि उसके समेत करीब दो सौ छात्र-छात्राएं हॉस्टल के पास बनाए बंकर में रुके हुए हैं। आसपास लगातार हो रहे धमाकों की आवाज से काफी डरे हुए हैं।
इस बीच पुलकित से संपर्क न हो पाने के कारण परिजन काफी बेचैन थे। राकेश ने बताया कि भारत सरकार के प्रयासों से उनके समेत बंकर में रहने वाले सभी दो सौ छात्र-छात्राओं को करीब साढ़े आठ सौ किलोमीटर दूर ट्रेन द्वारा हंगरी पहुंचा दिया। बुधवार सुबह 9 बजे वे लोग बस द्वारा हंगरी के एयरपोर्ट पर पहुंच गए। संवाद

हंगरी में अपने साथियों के साथ कमरे में पुलकित जमीन पर बैठे फोटो भेजा ।- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

इफरा खान- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

यूकेन के विनतिशा शहर से लौटी जया अपने परिजन के साथ अपने घर पर । संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

यूक्रेन से लौटने के बाद अंशिका को मिठाई खिलाते उसकी मां वंदना यादव पिता डा. अमीर सिंह । संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

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