शहर के लोग भीषण गर्मी में 12 से 14 घंटे बिजली कटौती को लेकर वैसे ही परेशान हैं, महकमे के कर्मचारी भी बिजली संकट को बढ़ावा देकर लोगों को बिजली के लिए तरसने को मजबूर कर रहे हैं। अक्सर देखा जाता है कि किसी इलाके में लाइन फाल्ट के बाद उसे ठीक करने कर्मचारियों का स्टाफ मौके पर उस वक्त पहुंचता है जब कटौती खत्म होने के बाद सप्लाई शुरू हो चुकी होती है।
पॉवर कारपोरेशन के सिस्टम कंट्रोल ने शहरी क्षेत्र में रोजाना नौ घंटे की नियमित कटौती लागू कर रखी है। सुबह चार से आठ बजे तक, दिन में 11 से दोपहर दो बजे तक और रात नौ से 11 बजे तक लोकल रोस्टरिंग का समय निर्धारित है। इसके अलावा आधी रात में दो से तीन घंटे की इमर्जेंसी रोस्टरिंग की जा रही है। विभाग के नियमानुसार लाइन फाल्ट ठीक करने, ट्रांसफार्मर, खराब पोल बदलने आदि काम कटौती के दौरान किए जाने चाहिए, जिससे कि सप्लाई शुरू होने पर इन्हीं कामों के लिए फीडर बंद नहीं करना पड़े।
फाल्ट की स्थिति के अनुसार नेटवर्क की खराबियां दूर करने को विभाग ने समय सीमा भी निर्धारित की है, लेकिन विभाग के ही कर्मचारी इन व्यवस्थाओं की धज्जियां उड़ाने पर आमादा हैं। होता यह है कि रात में कोई फाल्ट होने पर उसे आठ बजे से पहले ठीक करने के बजाय लाइन स्टाफ बिजली उपकेंद्रों से सीढ़ी लेकर तब निकलता है, जब सप्लाई शुरू हो चुकी होती है। इससे फीडर को अनावश्यक रूप से बंद रखना पड़ता है। नतीजे में बिजली सप्लाई शुरू होने के कुछ देर बाद प्रभावित क्षेत्र के लोग दूसरे दौर की नियमित कटौती में उलझ जाते हैं।
शुक्रवार को निशात तिराहे के पास यही किया गया। तड़के हुए 11 केवी लाइन फाल्ट को सुधारने फील्ड स्टाफ दोपहर की कटौती के बाद सप्लाई शुरू होने पर वहां पहुंचा। इस वजह से सब स्टेशन पर बिजली होने के बावजूद निशात तिराहा, लाल इमली चौराहा, बाड़ूजई फर्स्ट, कटिया टोला के पश्चिमोत्तर इलाके के सैकड़ों लोग तीन बजे तक बिजली को तरसते रहे।
फाल्ट ठीक करने की समय सीमा: एक नजर
0 लाइन फाल्ट: 30 मिनट से तीन घंटे तक
0 पोल खराबी: 12 से लेकर 24 घंटे तक
0 ट्रांसफार्मर रिप्लेसमेंट: 24 से लेकर 72 घंटे तक
इसलिए बंद करनी पड़ती है बिजली सप्लाई
बिजली सप्लाई के दौरान लाइनें बंद करके फाल्ट ठीक करने के पीछे कई कारण गिनाए जा रहे हैं। राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन के जिलाध्यक्ष शैलेंद्र पांडेय का कहना है कि लाइन मेंटीनेंस के लिए विभाग को मिले वाहन अफसरों के पास होने से फील्ड स्टाफ को पैदल पेट्रोलिंग करनी पड़ती है। कई लाइनों की लंबाइ्र दस किमी से ज्यादा होने से कर्मचारियों का काफी समय पदयात्रा में खर्च हो जाता है। उन्होंने बताया कि व्यापार संगठनों के क्षेत्रीय पदाधिकारियों के दबाव में भी अधिकारी चालू लाइन बंद कराकर फाल्ट ठीक करने का आदेश जारी कर देते हैं।