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Shahjahanpur News: शारीरिक से कम घातक नहीं मानसिक बीमारी

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राजकीय मेडिकल कॉलेज का मन कक्ष। संवाद
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शाहजहांपुर। मानसिक बीमारियों को लेकर पहले जहां लोग बात करने से कतराते थे, वहीं आज लोग इस विषय को लेकर मुखर हो गए हैं, लेकिन जागरूकता की अभी और आवश्यकता है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मानसिक बीमारी शारीरिक से कम घातक नहीं होती। समय से इलाज न मिलने पर स्थिति खराब हो सकती है।
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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 10 अक्तूबर को मनाया जाता है। लोगों को मानसिक रूप से स्वस्थ बनाने और तनावपूर्ण जीवन जी रहे लोगों की परेशानी को कम करने के उद्देश्य से राजकीय मेडिकल कॉलेज में बने मनकक्ष में आने वाले मरीजों के साथ ही लोगों के बीच जाकर उन्हें मानसिक विकार से मुक्त करने का प्रयास जाता है।
मानसिक रोग विशेषज्ञ डाॅ. अभिनव रस्तोगी ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य उतना ही आवश्यक है, जितना शारीरिक स्वास्थ्य। मदद मांगना कमजोरी नहीं, जागरूकता की पहचान है। उन्होंने बताया कि ओपीडी में 20 से 30 प्रतिशत मरीज सिरदर्द (माइग्रेन, टेंशनटाइप हेडेक), मूड डिसऑर्डर (डिप्रेशन, बाइपोलर डिसऑर्डर) के पहुंचते हैं।
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10 से 15 प्रतिशत मरीज मिर्गी (एपिलेप्सी), 5 से 10 प्रतिशत गंभीर मानसिक बीमारियों (स्किजोफ्रेनिया, सायकोसिस), 15 से 20 प्रतिशत मरीज एंग्जायटी, कन्वर्ज़न, ओसीडी जैसी समस्या, 10 प्रतिशत बच्चे बौद्धिक विकलांगता, एडीएचडी, ऑटिज्म जैसी विकृतियों के पहुंचते हैं।
10 प्रतिशत बुजुर्ग डिमेंशिया, पार्किंसन जैसी बीमारियों के पहुंचते हैं तो करीब पांच प्रतिशत मरीज नशे की लत (अल्कोहल, गांजा, ओपिऑइड) आदि से प्रभावित पहुंचते हैं। डाॅक्टर ने बताया कि केवल मानसिक बीमारियों से निजात दिलाने के लिए केवल दवाइयां ही नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक परामर्श, आईक्यू टेस्टिंग, पर्सनैलिटी टेस्टिंग तथा साइकोलॉजिकल सपोर्ट भी जरूरी है।

60-70 मरीजों की हो रही ओपीडी
सीएमओ डॉ. विवेक मिश्रा ने बताया कि हर व्यक्ति तक मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ कराना और समाज में जागरूकता बढ़ाने को लेकर कार्यक्रम चल रहा है। डॉ. अभिनव रस्तोगी के नेतृत्व में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने को लेकर डीएमएचपी टीम काम कर रही है। मेडिकल कॉलेज में सप्ताह में तीन दिन ओपीडी संचालित की जाती हैं। यहां प्रतिदिन करीब 60 से 70 मरीज मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परामर्श और उपचार के लिए पहुंचते हैं।

मामला-एक
अनचाहे विचारों से परेशान थी युवती
डाॅ. अभिनव रस्तोगी ने बताया कि ओसीडी (ऑब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर) एक मानसिक विकार है। एक 19 वर्षीय युवती इसकी शिकार हो गई थी। युवती बार-बार हाथ धोने और अनचाहे विचारों से परेशान थी। सामाजिक रूप से अलग-थलग पड़ गई थी। डीएमएचपी टीम ने दवाओं और बिहेवियरल थेरेपी के संयोजन से उसका उपचार किया। कुछ ही हफ्तों में उसने कॉलेज जाना शुरू किया और अब वह सामान्य जीवन की ओर लौट रही है।

मामला-दो

नींद न आने से परेशान था युवक
डॉक्टर ने बताया कि एक 24 वर्षीय युवक स्किजोफ्रेनिया का शिकार हो गया। उसे आवाजें सुनने और नींद न आने की शिकायत हो गई। परिवार में उसे गलत समझा जा रहा था। उचित एंटीसाइकोटिक दवाओं और परिवार को काउंसलिंग देने से उसकी हालत में सुधार हुआ। अब वह युवक फिर से काम पर जा रहा है।

मामला-तीन
एंग्जायटी डिसऑर्डर का शिकार हो गया युवक
35 वर्षीय युवक एंग्जायटी डिसऑर्डर का शिकार हो गया। उसे लगातार घबराहट, छाती में भारीपन और नींद की कमी जैसी परेशानी थी। टीम ने कम खुराक की एंटी-एंग्जायटी दवाएं, रेस्पिरेटरी रिलैक्सेशन ट्रेनिंग और तनाव प्रबंधन तकनीक सिखाईं। कुछ ही दिनों में उसने राहत महसूस की और दोबारा अपनी दिनचर्या में लौट आया।
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डॉक्टर ने बताए मानसिक रोग के लक्षण

-हर समय उदास महसूस करना
- बेचैन होना या ध्यान केंद्रित न कर पाना
- बहुत चिंता या भय होना
- अपराध की भावना महसूस करना
- मानसिक स्थिति में बहुत बदलाव होना
- समाज, परिवार और दोस्तों से दूर रहना
- शरीर में थकान और ऊर्जा में कमी
- खाने की आदतों में बदलाव
- बहुत गुस्सा या हिंसक व्यवहार दिखाना
- आत्महत्या करने के विचार आना

राजकीय मेडिकल कॉलेज का मन कक्ष। संवाद

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