शाहजहांपुर। स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत की मुहिम को जिला अस्पताल में पलीता लगाया जा रहा है। यहां मेडिकल वेस्ट खुले में फेंका जा रहा है, इससे यहां इलाज के लिए आने वाले लोगों को संक्रमण का खतरा पैदा हो गया है। मगर सीएमएस से लेकर अन्य जिम्मेदार अफसर इसको लेकर अनजान बने हैं।
कहने के लिए जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हो गया है, लेकिन की यहां बदहाली अब भी दूर नहीं हुई है। बृहस्पतिवार दोपहर ट्रॉमा सेंटर के बाहर गेट के पास ही मेडिकल वेस्ट खुले में डाल दिया गया। ट्रॉमा सेंटर के पीछे भी मेडिकल वेस्ट का ढेर लगा था। इस वजह से यहां इलाज को आने वाले मरीजों को संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
पिछले दिनों कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना जिला अस्पताल पहुंचे तो यहां ट्रामा सेंटर के बाहर और आसपास गंदगी देखकर मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. अभय सिंह और जिला अस्पताल के सीएएमएस डॉ. एमपी गंगवार से काफी नाराजगी जाहिर की थी। सफाई कर्मचारियों का एक दिन का वेतन भी कटवाया था। इसके बाद भी यहां के हालात नहीं सुधरे और मेडिकल वेस्ट खुले में फेंका जा रहा है। इमरजेंसी वार्ड के कमरों में सामने से तो सफाई नजर आती है लेकिन यहां की दुर्गंध मरीजों की बीमारी बढ़ा रही है।
आवासीय कॉलोनी में भी गंदगी से पटी नालियां
जिला अस्पताल के पीछे आवासीय कॉलोनी में नालियां गंदगी से पटी पड़ी हैं। इस वजह से यहां जलभराव हो जाता है। कॉलोनी में रहने वाले स्टाफ के लोग शिकायत करते हैं, तब सफाई हो जाती है लेकिन अनदेखी से फिर वही हाल हो जाता है।
लाखों की लागत से बना मेडिकल वेस्ट निस्तारण प्लांट ठप
वर्ष 2007-08 में जिला अस्पताल परिसर में बायोमेडिकल वेस्ट को नष्ट करने के लिए लाखों की कीमत से प्लांट लगवाया गया था। कुछ दिन चलने के बाद मशीन में खराबी आ गई। इसके बाद जब दोबारा चलवाने के लिए शासन को कागज भेजे गए, तब पता चला कि खर्चा अधिक आ रहा है। इस पर प्राइवेट नर्सिंग होम वालों से खर्च वहन करने की बात की गई लेकिन उन्होंने हाथ पीछे खींच लिए। अब एक कंपनी को बायो मेडिकल वेस्ट ले जाने का ठेका दिया गया है।
महिला और पुरुष अस्पताल से निकले बायोमेडिकल वेस्ट को अलग-अलग कमरों में रखा जाता है। सीतापुर की एक कंपनी इस बायोमेडिकल वेस्ट को अपने प्लांट पर ले जाकर नष्ट करती है। - डॉ. एमपी गंगवार, सीएमएस