बीएसए स्तर से नोटिस जारी करने बाद प्रशिक्षुओं द्वारा स्पष्टीकरण देने के बाद इस मामले की गहनता से जांच की गई। जांच में जिन 52 प्रशिक्षुओं के टीईटी अंक मैच नहीं कर रहे थे, वे बाद में मैच कर गए। साथ ही इस मामले में त्रुटि भी पकड़ में आ गई।
72825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के प्रमाण पत्रों में हेरफेर करने के मामले में 61 लोगों को नोटिस भेजे गए थे। इनमें 52 प्रशिक्षुओं के टीईटी अंक मैच नहीं कर रहे थे। इस पर बीएसए ने इन लोगों को नोटिस भेजा था। शनिवार को सभी प्रशिक्षुओं ने स्पष्टीकरण दे दिया।
इसके बाद डायट प्राचार्य और बीएसए के स्तर से प्रमाण पत्रों पर दर्ज अंकों का मिलान करवाया गया। बीएसए दफ्तर में लिपिक राजेश बाबू और डायट के लिपिक नरेंद्र शर्मा ने टीईटी प्रमाण पत्रों का मिलान माध्यमिक शिक्षा परिषद इलाहाबाद की ओर से जारी की गई लिस्ट से किया। इस पर सभी के अंक सही पाए गए। जांच में यह भी पाया गया कि प्रशिक्षु शिक्षकों के अंक गलत फीड किए जाने की वजह से परेशानी हो गई थी, जो अब सही हो गई है।
रिसीविंग न मिलने पर प्रशिक्षु शिक्षकों में भय
नगर संसाधन केंद्र पर प्रशिक्षण ले रहे जिन 10 प्रशिक्षुओं को नोटिस भेजा गया था। शनिवार को उन लोगों ने बीएसए दफ्तर में राजेश बाबू को स्पष्टीकरण देकर उसकी रिसीविंग मांगी। इस पर राजेश ने उन्हें यह कहकर मना कर दिया कि स्पष्टीकरण की रिसीविंग नहीं दी जा सकती है। इससे प्रशिक्षु शिक्षक सशंकित नजर आए।
प्रशिक्षुओं ने स्पष्टीकरण के साथ ही उनके प्रमाण पत्र में दर्ज अंक और उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से ऑनलाइन किए गए डेटा में सही अंक दर्ज होने की बात कही। साथ ही ऑनलाइन लिस्ट से मैच कराकर भी दिखाया। इस मौके पर अतुल कुमार, राजेश मिश्रा, विकास विक्रम, अनिरुद्घ मिश्रा, नृपेंद्र मिश्रा, संतोष अवस्थी, संतोष सक्सेना, प्रदीप त्रिवेदी आदि मौजूद रहे।
दस प्रशिक्षुओं की नौकरी पर अब भी खतरा
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के प्राचार्य गजराज सिंह यादव और बीएसए राजेश वर्मा ने संदिग्ध प्रशिक्षुओं के प्रमाण पत्रों की जांच कराने के बाद कहा कि स्नातक परीक्षा में सामान्य वर्ग के जिन प्रशिक्षुओं के अंक 45 प्रतिशत से कम और आरक्षित श्रेणी में 40 प्रतिशत से कम हैं। ऐसे नौ प्रशिक्षुओं की नौकरी पर खतरे की तलवार लटक गई है। बीएसए ने कहा कि एक प्रशिक्षु ऐसा भी है, जिसने टीईटी परीक्षा तो वर्ष 2011 में पास की, लेकिन बीएड वर्ष 2012 में किया। इस प्रशिक्षु की नौकरी भी फिलहाल खतरे में है।