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गंगा की तरह गोमती पर भी हों नजरें इनायत!

Sat, 20 Jun 2015 09:09 PM IST
आशुतोष शुक्ला/पुवायां (शाहजहांपुर)।
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गंगा को अविरल बनाने के लिए कैबिनेट की ओर से नमामि गंगे कार्ययोजना को मंजूरी मिल चुकी है। इसके तहत गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए अगले पांच साल में बीस हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। केंद्र की ओर से गंगा का तो उद्धार होने की उम्मीद बंध गई है, लेकिन इंद्र को श्राप से मुक्ति देने वाली गोमती नदी इस समय बीमार हो चली है। ऐसे में कराह रही गोमती को भी दिल्ली के मरहम की दरकार आ पड़ी है।
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गोमती की यात्रा पीलीभीत जनपद के माधौटांडा कस्बे के पास (गोमत ताल) फुलहर झील से शुरू होती है। उद्गम स्थल से जनपद शाहजहांपुर, लखीमपुर, सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, जौनपुर होते हुए 960 किमी का सफर तय करके वाराणसी में गोमती गंगा मिलन होता हैं। गोमती को सदानीरा बनाने में पीलीभीत में वर्षाती नाला, शाहजहांपुर में  झुकना, भैंसी, तरेउना, लखीमपुर में छोहा, सीतापुर में कठिना, सरायन, गोन, लखनऊ में कुकरैल, अकरद्दी, बाराबंकी में रेठ, कल्याणी, सुल्तानपुर में कादूनाला, जौनपुर में सई नदी का योगदान रहता है।
बता दें कि गौतम ऋषि ने श्राप मुक्ति के लिए इंद्र को गोमती के तटों पर 1001 स्थानों पर शिवलिंग स्थापित कर तपस्या करने को कहा था। इंद्र ने शिवलिंगों की स्थापना और तपस्या करके ऋषि के श्राप से मुक्ति पाई थी। वर्तमान समय में उद्गम स्थल से गोमती की धारा बंद हो चुकी है। कई किमी तक गोमती का पता भी नहीं लगाया जा सकता है। इसके बाद मिलने वाले पानी के स्रोतों से गोमती में फिर से जान पहुंच रही है। भीषण गर्मी और बरसात नहीं होने के कारण पुवायां क्षेत्र में भी गोमती की धार बंद होने की कगार पर पहुंच चुकी है।
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सैकड़ों एकड़ जमीन कब्जाए बैठे हैं माफिया
पुवायां। एक समय था जब गोमती नदी के किनारे सैकड़ों एकड़ जमीन पर जंगल की तरह पेड़ खड़े थे। धीरे-धीरे समय बदलता गया और गोमती के किनारों की हरियाली भी गायब होती गई। भूमाफियाओं ने नदी की जमीन पर कब्जा जमा लिया। अब तो गोमती की धारा तक खेती की जा रही है। यह हाल गोमती के किनारों पर कहीं भी देखा जा सकता है।
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कैसे हो रहा नुकसान
0 प्रदूषित जल नदी में गिराने और मछलियों के शिकार के लिए जहर डालने से।
0 नदी तटों तक कब्जा कर खेती करने और नदी तटों के पेड़ काटने से।
0 जली हवन सामग्री, खंडित प्रतिमाएं, कारखानों का गंदा पानी और गंदगी डालने से


गोमती को कैसे संवारें
0 नदी के किनारे पौधारोपण करना और गंदगी, गंदे पानी को नदी में पहुंचने से रोंकना।
0 जल प्रबंधन करना, श्रमदान से सफाई करके नदी की धारा को सुचारू बहने की व्यवस्था।
0 पूजन सामग्री को नदी में नहीं डाल कर भू विसर्जन करना और अवैध खनन रोकना।
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