तिलहर में मनोज के आवास की टूटी छत। संवाद
तिलहर। कलक्ट्रेट परिसर में शुक्रवार को शरीर पर डीजल छिड़ककर आत्मदाह की कोशिश करने वाले दंपती मोहल्ला मौजमपुर निवासी मनोज और सुनीता अपनी दो बेटियों के साथ पुराने मकान की जर्जर छत के नीचे गुजर-बसर कर रहे हैं। अधिकारियों ने दंपती की मांग के अनुसार उन्हें प्रधानमंत्री योजना के तहत आवास स्वीकृत करने की तैयारी कर ली है।
आत्मदाह की कोशिश करने के दौरान अधिकारियों ने दंपती से बात की। इस पर मनोज ने पत्नी सुनीता को आउटसोर्सिंग के बजाय संविदा श्रेणी का वेतन और परिवार के रहने के लिए सरकारी योजना से आवास दिलाने की मांग की।
अधिकारियों ने उनकी आवास की मांग तत्काल स्वीकार कर ली, लेकिन संविदा का वेतन दिलाने में नियमों का उल्लेख करके कोई आश्वासन नहीं दिया। मनोज का आरोप है कि उनके पिता नगर पालिका में संविदा श्रेणी में कार्यरत थे। इसलिए उनकी पत्नी को भी संविदा का वेतन दिया जाए।
मनोज ने कहा कि जो वेतन मिल रहा है उसमें भी कटौती की जा रही है। हालांकि, वेतन से कटौती के आरोप को नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी सुनील कुमार ने निराधार बताया।
ईओ ने बताया कि मनोज नौ माह तक अपने पिता की मृत्यु छिपाए रखकर उनकी पेंशन प्राप्त करते रहे। तत्कालीन एसडीएम अंजलि गंगवार के स्तर से सुनीता की आउटसोर्सिंग में नौकरी लगवाई गई। बाद में पालिका की ओर से गलत तरीके से ली गई पेंशन की वसूली के लिए सुनीता के वेतन से हर माह दो हजार रुपये की कटौती कराने की बात रखी, लेकिन मनोज ने पत्नी के वेतन से कटौती कराने से इन्कार कर दिया। ईओ के अनुसार मनोज को सरकारी आवास दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।