किसानों ने किया था विरोध प्रदर्शन
किसान का कहना है कि बाद में उनकी मक्का को रिजेक्ट घोषित कर रजिस्टर में भी दर्ज कर दिया गया। इस मामले की जानकारी मिलने पर 17 जुलाई की शाम भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के तराई क्षेत्र उपाध्यक्ष सुखदेव सिंह खिंडा, तरविंदर सिंह मोमी और जिलाध्यक्ष अनिल सिंह यादव खरीद केंद्र पहुंचे। केंद्र प्रभारी के मौजूद न मिलने पर किसानों और कार्यकर्ताओं ने केंद्र के बाहर नारेबाजी की, प्रतीकात्मक रूप से मक्का जलाया और धरने पर बैठ गए। साथ ही पुतला दहन की चेतावनी भी दी।
किसान नेताओं का आरोप है कि विरोध-प्रदर्शन के दबाव के बाद पहले रिजेक्ट की गई मक्का की तौल कर ली गई। उनका कहना है कि यदि मक्का मानक के अनुरूप थी तो पहले तौल क्यों नहीं की गई और यदि गुणवत्ता खराब थी तो बाद में उसे कैसे स्वीकार कर लिया गया। उन्होंने खरीद केंद्रों की कार्यप्रणाली की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।