शाहजहांपुर। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस पर जिला अस्पताल के ब्लडबैंक में शिविर का आयोजन हुआ। इसमें मानवता की जीवन रक्षा के लिए तमाम महादानियों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाते हुए रक्तदान किया। कई ने आग्रह भी किया कि जरूरत पड़ने पर तीन माह बाद वह फिर रक्तदान को तत्पर रहेंगे।
गुरुवार सुबह दस बजे से शुरू हुए रक्तदान शिविर का मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एमपी गंगवार ने राजकीय मेडिकल कॉलेज की वाइस प्रिंसिपल डॉ. नीरा गोयल, पैथालॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. एसके ध्रुव और ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. शबाहत हुसैन की उपस्थिति में फीता काटकर उद्घाटन किया। इसके साथ ही अमर उजाला फाउंडेशन की अपील पर वहां पहुंचे महादानियों ने रक्तदान करना शुरू कर दिया। सबसे पहले तिलहर क्षेत्र के राईपुर से आए सोनू पुत्र भूपराम ने रक्तदान किया। उन्होंने बताया कि जीवन में पहली बार रक्तदान किया और इसी के साथ रक्तदान को लेकर उनके मन की कई शंकाएं मिट गईं। रेलवे कॉलोनी के अवनीश कुमार, मीरानपुर कटरा के मोहल्ला फीलनगर निवासी सैफ खां, रामनगर कॉलोनी के महेंद्र चावला, टाउनहाल के रोहित अग्रवाल, तारीन बहादुरगंज के मनोग्य रैना, महमंद गढ़ी निवासी कमाल फहीम, शाहजहांपुर के रुद्र मोहन त्रिपाठी, हथौड़ा बुजुर्ग निवासी अविनाश सिंह की पत्नी रीना सिंह और महानगर के मोहल्ला दिलाजाक निवासी हसीब खां ने रक्तदान करने के बाद कहा कि अन्य लोगों को भी रक्तदान के लिए जागरूक करेंगे। शिविर में कुल 11 लोगों ने रक्तदान किया।
अमरेंद्र और रीना की सेवा भावना बनी मिसाल
पड़ोसी जनपद सीतापुर की श्रीनगर कॉलोनी निवासी अमरेंद्र पाल यहां किसी काम से आए थे, लेकिन अमर उजाला में रक्तदान के बारे में अपील पढ़ने के बाद उनके कदम जिला अस्पताल की ओर मुड़ गए। इसी तरह हथौड़ा बुजुर्ग की रीना सिंह की रक्तदान को लेकर तत्परता आज फिर जाहिर हुई। इससे पहले, गत जून माह में विश्वदाता दिवस पर अमर उजाला फाउंडेशन के शिविर में भी वह रक्तदान कर चुकी हैं। रीना के पति अविनाश सिंह का कहना है कि वह पत्नी की इच्छा पर उन्हें रक्तदान को लेकर आए हैं। सीएमएस डॉ. गंगवार और पैथालॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. ध्रुव ने रक्तदान को लेकर सभी के जज्बे की सराहना की। साथ ही उन्हें जिला अस्पताल और अमर उजाला की ओर से रक्तदान प्रमाण पत्र प्रदान किए।
...जब पिता-पुत्र रक्तदान को हुए तत्पर
उद्योग व्यापार मंडल मिश्रा गुट के जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह दुआ के साथ आए व्यापारी नेता धर्मपाल रैना को वर्ष 2016 में हार्टअटैक पड़ा था। उनके हृदय की धमनियों के ब्लॉकेज रोकने के लिए चार रिंग डाले जा चुके हैं। वह चिकित्सीय देखरेख में हैं। इसके बावजूद वह सुबह जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्तदान करने की जिद पर अड़ गए। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. शबाहत हुसैन और काउंसलर छाया सक्सेना ने उनकी केस हिस्ट्री को देखते रक्तदान नहीं करने की सलाह दी तो उन्होंने हाल में कराई गई खून की जांच का हवाला देते हुए तर्क दिया कि उनका हीमाग्लोबिन पर्याप्त है। इसलिए किसी बीमार बच्चे के काम आने लायक आधा यूनिट खून ले लिया जाए। चिकित्सा स्टाफ ने उन्हें विनम्रतापूर्वक रक्त लेने से मना किया। कुछ देर बाद उनके बेटे मनोग्य रैना ने वहां पहुंचकर रक्तदान की इच्छा जताई तो ब्लड बैंक के अधिकारी फिर पशोपेश मेें पड़ गए क्योंकि तीन माह के अंदर दोबारा रक्तदान करने से मना किया जाता है, जबकि मनोग्य रैना इससे पहले पांच जुलाई को एक यूनिट रक्त दे चुके थे। उनके रक्तदान की निर्धारित अवधि पांच अक्तूबर को पूरी हो रही है। हालांकि, बाद में विभागाध्यक्ष से परामर्श कर मनोग्य को रक्तदान का अवसर दे दिया गया।
इन सभी का रहा सहयोग
रक्तदान शिविर के आयोजन मेें जिला अस्पताल के अधिकारियों और डॉक्टरों के अतिरिक्त लैब टेक्नीशियन महेंद्र त्रिपाठी, रामू नायक, परामर्शदाता छाया सक्सेना, ब्लड बैंक सहायक सत्येंद्र कुमार, रजनीश कुमार आदि का काफी सहयोग रहा। अंत में ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. हुसैन ने सभी का आभार व्यक्त किया।