शाहजहांपुर/बरतारा। पितृ पक्ष में जहां तमाम लोग पूर्वजों की संतुष्टि के लिए विधि-विधान से पूजा कर उनका स्मरण कर रहे हैं, वहीं ऐसे भी कई परिवार हैं, जिन्होंने अपने वृद्ध माता-पिता को उपेक्षित कर घर छोड़ने और अपने हाल पर जीवन बिताने के लिए मजबूर कर दिया है। बरतारा के विनोबा सेवा आश्रम परिसर में समाज कल्याण विभाग से संचालित वृद्ध आश्रम के संवासी बुजुर्ग इस कड़वी सच्चाई के गवाह हैं।
बरेली की स्वयंसेवी संस्था जीव जन कल्याण समिति की देखरेख में चलाए जा रहे वृद्ध आश्रम में इस समय 117 वृद्धजन हैं। कोई बेटे के शराबी होने से परेशान है तो किसी को पुत्रवधू से तिरस्कार मिला है। कई ऐसे भी वृद्धजन हैं, जिन्हें घर में बेटे-बहू की आपसी कलह ने परेशान किया तो कुछ ऐसे भी दादा-दादी हैं, जिन्हे अपने सामने पोते-पोतियों को बेटों-बहुओं द्वारा पीटा जाना रास नहीं आया।
समिति के केयरटेकर बृह्मदेव ने बताया कि हर साल घरवालों के मनाने पर सात-आठ वृद्ध अपने घर खुद लौट जाते हैं। कई ऐसे भी वृद्धजन हैं, जो पोते-पोतियों की याद आने पर उनसे मिलने जाते हैं, लेकिन घर पर रुकने के बजाय फिर आश्रम लौट आते हैं।
बेटे ने परेशान कर घर छोड़ने के लिए किया मजबूर
लखनऊ में राज्य सरकार के अधीन एक विभाग में अच्छे ओहदे पर तैनात रहे 70 वर्षीय बुजुर्ग को बेटे ने परेशान कर घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया। उनके दो बेटियां और इकलौता बेटा है। घर के बारे में पूछने पर वह मायूस होकर बोले कि बेटियां हालचाल लेती रहतीं हैं, लेकिन बेटा कभी फोन भी नहीं करता। पास के जिले में ही घर है, लेकिन बेटे ने घर से जुड़ी उम्मीदों पर जीते जी पानी फेर दिया है।
बेटे ने मारपीट की तो घर से हो गया मोहभंग
वृद्ध आश्रम में बुढ़ापा बिता रहे 75 वर्षीय बुजुर्ग पर जिस दिन बेटे ने हाथ उठाया, उसी वक्त उनका घर से मोहभंग हो गया। वह बताते हैं- कुछ दिन तक बच्चों का मोह उन्हें घर पर रोके रहा, लेकिन बाद में अक्सर बेटा मारपीट करने लगा तो कलेजे पर पत्थर रखकर घर छोड़ दिया। वह छह माह से आश्रम में रह रहे हैं, लेकिन बेटे ने उनसे कभी संपर्क कर उनका हाल जानने की कोशिश नहीं की है।
पोता-पोती को बेटे ने पीटा तो छोड़ दिया घर
शराब पीकर पोता-पोती को पीटने से मना करने पर बेटे ने गालियां देनी शुरू कीं तो रोजा क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली 65 वर्षीय बुजुर्ग घर छोड़कर वृद्ध आश्रम चली आईं। वह रुंधे गले से बताती हैं कि बेटा उन्हें भले ही कुछ भी कह ले। पोते-पोतियों से पशुवत व्यवहार सहन नहीं हो सका। बताया कि डेढ़ साल यहां रहते हो गया। घर की याद आती है, लेकिन बेटे की वजह से घर जाने का मन नहीं करता।
बेटों की आपसी लड़ाई ने मां को कर दिया बेघर
शहर के एक मोहल्ले की रहने वाली 76 वर्षीय वृद्धा को बेटों की आपसी कलह ने घर से बेघर कर दिया। पति केंद्र सरकार में सेवारत थे। उनके निधन के बाद तीनों बेटों में आपसी स्वार्थ टकराने से आए दिन झगड़ा होने लगा। इस कारण दो साल पहले घर छोड़ आईं। कहती हैं कि बुढ़ापे में दोनों समय का खाना मिल जाए, यही बहुत है।