परौर थाना क्षेत्र में पांच साल पहले बच्चों के विवाद में आक्रोश में आकर एक परिवार के लोगों द्वारा दूसरे परिवार के एक सदस्य को दबोचकर फावड़े व भाला से वारकर हत्या कर दिए जाने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय अनिल कुमार पांडेय ने सुनवाई पूरी करते हुए आरोपी शिवपाल सिंह को दोषीसिद्ध अभियुक्त करार दिया। उसे उम्र कैद की सुनाई और 10 हजार रुपये का जुर्माना भी मुकर्रर किया। इस मामले में अभियुक्त के दो भाइयों (शीशपाल सिंह और सुखपाल सिंह) को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।
यह घटना छह अगस्त 2011 को परौर थाना क्षेत्र के गांव डंबर नगला में सायं करीब पांच बजे हुई थी। उससे तीन दिन पहले वादी पातीराम के बच्चों के साथ गांव के ही शिवपाल सिंह के बच्चों के साथ विवाद हो गया। उसी को लेकर दूसरा पक्ष रंजिश मनाने लगा। घटना वाले दिन वादी, उसका भाई नेत्रपाल व उसका बेटा उमेश शाम को खेत पर काम करके घर वापस लौट रहे थे कि सोनपाल के घर के सामने अचानक शिवपाल और उसके भाइयों ने कुछ अन्य धारदार हथियारों से लैस लोगों के साथ नेत्रपाल को दबोच लिया। उसे तीन लोगों ने हाथ और पैर की ओर से जकड़ दिया जबकि शिवपाल ने फावड़े से ताबड़तोड़ वार कर दिया जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। वादी और उसके भतीजे द्वारा शोर मचाने पर हमलावर अपने घरों की ओर भाग निकले। बारिश का पानी खेतों, चकरोड व मार्ग पर जमा होने एवं कीचड़युक्त रास्ते पर दूर - दूर तक कोई साधन न होने पर लाश को मौके पर ही पड़ा रहने देकर वादी ने थाने में सात अगस्त 2011 की सुबह घटना की सूचना दी। एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया एवं बाद में कोर्ट में चार्जशीट दायर की जिसमें शिवपाल के साथ उसके उक्त दोनों भाइयों को भी आरोपी बताया गया था।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य, सात गवाहों के बयान एवं सरकारी वकील उमेश गुर्जर और बचाव पक्ष के वकील भावशील शुक्ला के तर्कों का अवलोकन करने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने साक्ष्यों के अभाव में तीन में दो भाइयों को बरी किए जाने का फैसला सुनाया। दोषीसिद्ध पाया गया आरोपी की जमानत खारिज करते हुए उसे कोर्ट में पुलिस अभिरक्षा में ले लिया गया और जेल भेजा गया।