नेटवर्क पर लोड कम करने के लिए उपभोक्ताओं को एलईडी बल्ब खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने वाले विद्युत निगम के अधिकारी पावर कारपोरेशन का सिर दर्द खत्म होने के बाद उपभोक्ता से पल्ला झाड़ रहे हैं। रियायती दरों पर बेचने की योजना में बिके अस्सी हजार से अधिक एलईडी बल्ब में से 25 से 30 फीसदी खराब हो चुके हैं। बिल दिखाकर रियायती दरों पर मिले इन बल्बों की दो साल की वारंटी थी लेकिन बल्ब बेचने वाले कैनोपी विक्रेता गायब हैं। अगर मिल भी गए तो न बल्ब बदले जा रहे हैं और ही कीमत वापस की जा रही है। जनता विक्रेताओं को खोज-खोजकर परेशान है और इन कैनोपी का उद्घाटन करने वाले बिजली विभाग के आला अधिकारी जनता की समस्याओं से पल्ला झाड़ रहे हैं। अधीक्षण अभियंता का साफ कहना है कि यह केंद्र सरकार की योजना थी, मेरा इससे क्या मतलब।
दरअसल, उपभोक्ताओं को बताया गया कि दो साल की वारंटी वाले एलईडी बल्ब नवंबर के अंत तक रियायती मूल्य पर मिलने बंद हो जाएंगे। चूंकि, खुले बाजार में एलईडी 250 से 300 रुपये में बिक रही है इसलिए विभाग के कैनौपी वाले कैंपों पर लोग उमड़ते रहे और बिल दिखाकर रियायती दर पर एलईडी खरीदते रहे। अब एलईडी खरीदने वाले पछता रहे हैं क्योंकि विक्रेताओं ने कैनोपी कैंप के ठिकाने बदल दिए हैं। जहां से बल्ब खरीदे, वहां जाने पर मैदान सफाचट मिल रहा है। खास बात यह है कि एलईडी बल्ब मुहैया कराने वाले यह कंपनियां नामी गिरामी हैं फिर जनता से धोखा हो रहा है।