सिटी पार्क में चल रहे सत्संग में सद्गुरु भगवान जी ने दूसरे दिन भी ज्ञान की गंगा बहाई। इस अवसर पर मौजूद हजारों महिलाओं, पुरुषों और युवाओं ने अध्यात्मिक गुरु भगवान जी के दर्शन कर सद्विचारक सुने और नववर्ष पर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया।
सिटी पार्क में सजे विशाल पंडाल में पूर्वांह करीब 11 बजे भगवान जी लग्जरी गाड़ी से मंच पर लाए गए। इसके बाद उनके अनुयायियों ने आरती कर भजनों के माध्यम से सद्गुरु का गुणगान किया। करीब पौन घंटे तक भजन हुए और उसके बाद गैर जनपदों से आए अनुयायियों ने सुकराना पेश कर गुरु महिमा का बखान किया। फिल्मी गीतों की तर्ज पर तैयार भजनों पर तमाम महिलाओं और पुरुषों ने जमकर नृत्य किया।
इसके बाद अपने अनुयायियों को उपदेशित करते हुए भगवान जी ने सभी का आह्वान किया कि वह अपनी इच्छा छोड़कर परमात्मा की इच्छा प्राप्त करें, तभी कल्याण संभव है। कहा: संसार की डिग्री 10-20 साल की ही होती है, लेकिन अध्यात्म की डिग्री अनलिमिटेड है। इसलिए जब तक जीएं तब तक सीखते रहें। सीखने की कोई उम्र नहीं होती। सद्गुरु ने कहा कि वाणी से स्वभाव का पता चलता है। इसलिए सभी को अपना आचरण सुधारना चाहिए। अहंकार व्यक्ति तो बरबाद कर देता है। हमें अहंकार त्यागकर सिर झुकाकर चलने की आदत डालनी चाहिए। संसार में कोई बुरा नहीं, है, जरूरत अपने मन को भला करने की है।
उन्होंने एक दृष्टांत सुनाते हुए कहा कि अपने को छोटा बनाकर रहने की आदत डालनी चाहिए। तभी लाभ मिल सकता है। जिस तरह रेत में चीनी बिखेर देने से हाथी उसे नहीं खा सकता, लेकिन चीटी उसका लाभ उठा सकती है। उन्होंने कहा कि गुरु हमें जागृत करता है, वह चेतना पैदा करता है, ज्ञान जगाता है, अध्यात्म जगाता है। जब जानवर सीख सकते हैं तो हम मानव क्यों नहीं।