शाहजहांपुर। पश्चिम एशिया में युद्ध के संकट के चलते बाजार में महंगाई का असर दिखाई देना शुरू हो गया है। ट्रांसपोर्टरों ने भाड़ा बढ़ा दिया है। इसके असर से घर बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं की कीमतों में इजाफा हुआ है। सरिया, मौरंग, बजरी के भाव 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इससे मकान बनाना महंगा हो गया है। महंगाई के चलते वस्तुओं की मांग भी घटने लगी है।
कारोबारियों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने और परिवहन लागत बढ़ने से कीमतों में उछाल आया है। युद्ध के असर से पेट्रोल और डीजल की हो रही किल्लत की वजह से ट्रांसपोर्टर ने भाड़ा बढ़ा दिया है। इसकी वजह से वस्तुओं की कीमत में इजाफा हुआ है। इसका असर बाजार में दिखने लगा है।
कोयला महंगा होने से ईंट के भाव 200 से 300 रुपये प्रति हजार बढ़ गए हैं। ट्रांसपोर्ट का असर भी ईंट की ढुलाई पर पड़ा है। टाइल्स के भाव में भी वृद्धि हुई है। टाइल्स को बनाने में गैस का इस्तेमाल किया जाता है। गैस की आपूर्ति कम होने से टाइल्स की कीमतें बढ़ गईं हैं। सीमेंट के भाव भी बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। इसका मध्यम वर्ग के लोगों पर सबसे अधिक असर पड़ेगा।
अब मकान बनाना महंगा हो गया है। बिल्डरों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर स्थिति सामान्य होने तक निर्माण सामग्री के दामों में राहत की संभावना कम है। आने वाले दिनों में प्रापर्टी भी महंगी हो सकती है। कारोबारियों का कहना है कि लोगों ने फिलहाल प्रापर्टी खरीदना कम कर दिया है। बाजार में अनिश्चितता का दौर होने के कारण लोग धनराशि लगाने से बच रहे हैं।
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व्यापारियों से बात
बजरी, मौरंग और सरिया के भाव में 10 से 15 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इससे मकान बनाने में ज्यादा लागत आने लगी है। भाव बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है कि डीजल की किल्लत से ट्रांसपोर्टरों ने दरें बढ़ा दी हैं। सरिया, मौरंग, बजरी के भाव काफी बढ़ गए हैं।
- प्रिंस गुप्ता, रियल स्टेट कारोबारी
थिनर और ऑयल महंगा होने से पेंट के भाव में 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। महंगाई का असर बाजार में दिखने लगा है। इससे पेंट की मांग कम हुई है। युद्ध समाप्त होने के बाद भाव में गिरावट होने की संभावना है। फिलहाल दामों में लगातार बढ़ोतरी होती जा रही है।
- आशीष अग्रवाल, पेंट कारोबारी
प्रिंस गुप्ता, रियल स्टेट कारोबारी
प्रिंस गुप्ता, रियल स्टेट कारोबारी