विवाद बढ़ने पर भीड़ ने हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर पुलिस और बीएसए रणवीर सिंह मौके पर पहुंच गए। बताते हैं कि नोकझोंक के दौरान शिक्षिका पूर्णिमा बेहोश हो गईं। इसके बाद पुलिस उन्हें चौक कोतवाली ले आई। बीएसए ने पुलिस की उपस्थिति में पीड़ित बच्चों के बयान दर्ज किए। इसके बाद उन्हें अस्पताल भिजवाने की कवायद शुरू की।
वहीं, अभिभावकों ने केरूगंज से राजघाट चौकी की ओर जाने वाले रास्ते को जाम कर दिया। पिटाई से बेसुध छात्र-छात्राओं को रोड पर लिटाकर प्रदर्शन कर शिक्षिका पर कार्रवाई की मांग की। पुलिस और तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई का आश्वासन देकर करीब 30 मिनट के बाद जाम खुलवाया। मामले में अभिभावकों की ओर से तहरीर दी गई है।
एसपी सिटी सुधीर जायसवाल ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा। मामले की जांच कर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
बच्चों को सिर पर लगी चोट, हाथ-पैर में आई सूजन
सहायक अध्यापिका पूर्णिमा रस्तोगी की पिटाई से बच्चों के हाथ-पैर और पीठ पर काफी चोट आई है। किसी के सिर में चोट लगी है। हाथ-पैर में सूजन और दर्द से बच्चे कराहते रहे। उनका राजकीय मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर में उपचार किया गया। इसके साथ ही सभी का मेडिकल परीक्षण भी कराया गया।
अभिभावक बोले-शिक्षिका पर हो कार्रवाई
अभिभावक खालिद ने कहा कि शिक्षिका ने उनके बेटे शोएब और भतीजी अफरा को पीटा है। अन्य बच्चों के साथ भी बेरहमी दिखाई। शिक्षिका को तत्काल प्रभाव से नौकरी से निकाला जाना चाहिए।
अभिभावक राशिद ने कहा कि भांजी रैना को शिक्षिका द्वारा मारे जाने की जानकारी मिलने पर स्कूल आकर देखा। रैना बेसुध पड़ी थी। उसे अस्पताल ले जाया गया। शिक्षिका के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।
बीएसए रणवीर सिंह ने कहा कि सहायक अध्यापिका पूर्णिमा की हरकत ठीक नहीं थी। उन्हें निलंबित कर बीआरसी ददरौल से संबद्ध कर दिया गया है। मुख्यालय के खंड शिक्षा अधिकारी एसके मौर्य और नगर शिक्षा अधिकारी को मामले की जांच कर 15 दिन में रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है।
पहले भी निलंबन के साथ शुरू हुई थी विभागीय जांच
नगर शिक्षा अधिकारी सपना रावत ने बताया कि शिक्षिका ने पूर्व में भी इस तरह की हरकत की है। इस पर उनको निलंबित किया गया था। इसके बाद भी उनका व्यवहार नहीं बदला। बाद में बहाल होने पर शिक्षिका पूर्णिमा को एआरपी बनाया गया था तब भी उनका व्यवहार ठीक नहीं रहा।
नगर शिक्षा अधिकारी ने बताया कि पूर्णिमा ने उनके साथ भी अभद्रता की थी। इसकी शिकायत उन्होंने उच्चाधिकारियों से की थी। बाद में पूर्णिमा को कंपोजिट विद्यालय किला में सहायक अध्यापिका के रूप में तैनात किया गया था।